FCRA Amendment Bill 2026: आखिर इस बिल में क्या है ऐसा, जिस पर संसद में मचा है सियासी बवाल?
FCRA Bill यानी विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयकएक ऐसा बिल है, जो विदेश से पैसा लेने वाले NGO यानी गैर-सरकारी संगठन और संस्थाओं के नियमों में बदलाव करेगा। सरकार का कहना है कि यह बिल NGO को गलत या गैर-कानूनी तरीकों से मिलने वाले फंड पर रोक लगाएगा। वहीं, विपक्ष का तर्क है कि इससे NGO पर सरकार का नियंत्रण और बढ़ जाएगा। ऐसे में, FCRA बिल को लेकर सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच घमासान शुरू हो गई है, जो संसद से लेकर सड़कों तक देखी जा रही है। तो चलिए जानते हैं यह FCRA बिल क्या है, जिसके जरिए मोदी सरकार विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून में बदलाव करना चाहती है?
FCRA बिल कौन ला रहा है?
बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार FCRA बिल को लेकर आ रही है। इस बिल को गृह मंत्रालय की तरफ से संसद में पेश किया जाएगा और इसका उद्देश्य FCRA अधिनियम 2010 में संशोधन करना है। विपक्षी दल इस बिल का मुख्य तौर पर विरोध कर रहा है। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इस संशोधन से सरकार को NGO की संपत्तियों पर ज़्यादा नियंत्रण मिल जाएगा। इस बिल के विरोध में सबसे अधिक कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), DMK, AAP, समाजवादी पार्टी, वाम दल और INDIA गठबंधन के अन्य सहयोगी दल संसद में घमसान मचाए हुए हैं।
इस बिल पर सरकार का क्या कहना है?
FCRA बिल पर मोदी सरकार का कहना है कि इस बिल का उद्देश्य विदेशी फंडिंग में ट्रांसपेरेंसी को बढ़ाना और गलत तरिके से इस्तेमाल को रोकना है। सरकार का कहना है कि इस बिल को लाने का मकसद किसी धर्म या विशेष संगठन को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि, इसे रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए संसद में पेश करना है।
विपक्ष का आरोप क्या है?
FCRA बिल को लेकर विपक्षी दलों का आरोप है कि इस बिल के आने से NGO की संपत्ति पर सरकार का कंट्रोल बढ़ सकता है। विपक्ष का कहना है कि इस बिल से समाज सेवा करने वाले NGO और चैरिटी संस्थाओं की आजादी पर सरकार रोक लगा सकती है। उन्होंने आगे आरोप लगाया है कि सरकार का इन संस्थाओं पर दबाव बढ़ जाएगा। सरकार अपनी मर्जी से NGO को नियंत्रण में रखेगी। इसी वजह से विपक्ष संसद के अंदर और बाहर FCRA बिल का विरोध कर रहा है।
FCRA कानून लाने का क्या है उद्देश्य?
मोदी सरकार का मकसद है कि FCRA कानून आने से NGO को विदेश से मिलने वाले चंदे और फंडिंग को नियंत्रण करना है। यह निश्चित करना है कि विदेशी पैसों का इस्तेमाल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक हित के विरोध में न हो। इतना ही नहीं इस बिल को लाने का एक और मकसद है कि NGOs, ट्रस्ट, सोसायटी और अन्य संस्थाओं की विदेशी फंडिंग पर नजर बनाए रखना।
FCRA Amendment Bill में क्या-क्या बदलाव करने की तैयारी है?
FCRA संशोधन बिल लाने के पीछे सरकार का मुख्य मकसद NGO के काम करने के तरीकों को दिखाना है। ऐसे में जिन NGO के FCRA लाइसेंस कैंसल हो गए हैं, एक्सपायर हो गए हैं, या सरेंडर कर दिए गए हैं, उनके विदेशी फंड से खरीदे गए एसेट्स को मैनेज करने के लिए एक 'डेसिग्नेटेड अथॉरिटी' अपॉइंट की जाएगी। अगर किसी NGO का FCRA लाइसेंस रद्द हो जाता है, तो सरकार एक नामित प्राधिकरण (Authority) बनाएगी। यह प्राधिकरण उस NGO की विदेशी पैसे से खरीदी गई संपत्ति पर नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर उसे बेच भी सकेगा। इसके अलावा, इस बिल के आने से कुछ नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले दंड और जुर्माने से जुड़े प्रावधानों में बदलाव आएंगे।

Join Channel