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तमिलनाडु: 35 करोड़ रुपए के रिश्वत मामले में डीएमके विधायक और उनके भाई को अग्रिम जमानत

11:43 PM Jul 08, 2026 IST | News Desk
तमिलनाडु  35 करोड़ रुपए के रिश्वत मामले में डीएमके विधायक और उनके भाई को अग्रिम जमानत
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चेन्नई, 8 जुलाई (आईएएनएस)। मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार को डीएमके विधायक वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी। यह मामला तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव के दौरान वोट को प्रभावित करने के लिए 'तमिलगा वेट्री कझगम' (टीवीके) के एक विधायक को 35 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की कोशिश के आरोपों से जुड़ा है।

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जस्टिस पी. इलानथिराययन ने दोनों याचिकाकर्ताओं को कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे दी। कोर्ट ने उन्हें अगले आदेश तक हर दिन जांच अधिकारी के सामने पेश होने और जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया।

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सुनवाई के दौरान सेंथिल बालाजी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एन.आर. इलांगो ने दलील दी कि कथित फोन कॉल के दो दिन बाद शिकायत दर्ज कराई गई थी और अभियोजन पक्ष के पास बातचीत की कोई रिकॉर्डिंग नहीं थी; वे केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) पर निर्भर थे।

उन्होंने कहा कि सरकार को अस्थिर करने की कोशिश के दावों सहित सभी आरोप पूरी तरह से अनुमानों पर आधारित थे।

जब कोर्ट ने बालाजी की भूमिका के बारे में स्पष्टीकरण मांगा, यह देखते हुए कि एफआईआर में उन्हें विशेष रूप से आरोपी नहीं बनाया गया था, तो इलांगो ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने केवल यह बात कही थी कि बालाजी उसी दिन इरोड में थे जिस दिन मुख्य आरोपी वहां था।

उन्होंने आगे तर्क दिया कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित था और इसका मकसद करूर उपचुनाव से पहले बालाजी को अपने कर्तव्यों का पालन करने से रोकना था।

अशोक कुमार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट पी. कुमारेशन ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को केवल इसलिए फंसाया गया क्योंकि वह बालाजी के भाई थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जांचकर्ता ठोस सबूतों के बिना मामला बनाने की कोशिश कर रहे थे।

याचिका का विरोध करते हुए, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर जॉन सत्यन ने कोर्ट को बताया कि जांचकर्ताओं को साजिश का संकेत देने वाली सामग्री मिली है, जिसमें चेन्नई में होटल के कमरे बुक करना भी शामिल है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि आरोपियों में से एक सिंगापुर भाग गया था और उसने दूर से ही सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिया था, जिसे जांचकर्ता रिकवर करने की कोशिश कर रहे थे।

अभियोजन पक्ष ने आगे आरोप लगाया कि जांच में हवाला लेनदेन की ओर इशारा करने वाले सबूत मिले हैं और बेंगलुरु में पूछताछ के दौरान नई जानकारियां सामने आई हैं।

सत्यन ने कहा कि इस मामले में राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय पर चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश शामिल थी और दोनों याचिकाकर्ताओं को कथित साजिश से जोड़ने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद थी।

यह मामला 26 जून को टीवीके विधायक एम. इलैयाराजा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि थिरुनावुक्कारासु नाम के एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्तावित कदम का समर्थन करने के लिए 35 करोड़ रुपए की पेशकश की।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इनकार करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी। 1 जुलाई को तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद पुलिस ने दावा किया कि विधायक से संपर्क करने की कोशिश सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार के कहने पर की गई थी।

अपनी जमानत याचिकाओं में, दोनों भाइयों ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया। उन्होंने तर्क दिया कि मूल एफआईआर में सेंथिल बालाजी का नाम नहीं था, रिश्वत की कथित कोशिश से उन्हें जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं है, और यह मामला राजनीतिक कारणों से प्रेरित है।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

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