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ईरान-अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ा, वैश्विक संकट गहराने की आशंका : रिटायर्ड ब्रिगेडियर शारदेंदु

11:54 PM Jul 08, 2026 IST | News Desk
ईरान अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ा  वैश्विक संकट गहराने की आशंका   रिटायर्ड ब्रिगेडियर शारदेंदु
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नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों के बीच रिटायर्ड ब्रिगेडियर शारदेंदु ने कहा कि मध्य-पूर्व में हुआ युद्धविराम शुरू से ही बेहद नाजुक था और अंततः उसका टूटना तय था। उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को महंगाई, ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।

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उन्होंने कहा कि जिस 'फ्रेजाइल सीजफायर' की घोषणा की गई थी, वह व्यवहारिक रूप से भी उतना ही कमजोर साबित हुआ। युद्धविराम टूटने की शुरुआत ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की ओर से हुई। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जिस प्रकार व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया गया और लगातार तीन कमर्शियल जहाजों पर हमले हुए, उसने अमेरिका को सैन्य कार्रवाई का अवसर दे दिया।

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उन्होंने दावा किया कि इसके बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाते हुए लगभग 80 टारगेट को निशाना बनाया। इन लक्ष्यों में कमांड सेंटर, लॉन्चिंग साइट और स्पीड बोट जैसे सैन्य ठिकाने शामिल थे, जिससे भारी नुकसान हुआ। ईरान चाहता था कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले समुद्री मार्ग पर उसकी निगरानी और नियंत्रण बना रहे, जबकि अमेरिका और अन्य देश स्वतंत्र समुद्री आवाजाही के पक्षधर थे। इसी टकराव ने हालात को और अधिक विस्फोटक बना दिया।

रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ने कहा कि मौजूदा संघर्ष केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में वर्चस्व की लड़ाई है। अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने दुनिया को यह संदेश दिया कि ईरान अभी भी मजबूत सामाजिक समर्थन रखता है। ऐसे माहौल में अमेरिका की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे थे और उसे अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करने की आवश्यकता महसूस हुई। आईआरजीसी की कार्रवाई अमेरिका के लिए सीजफायर तोड़ने का बहाना बन गई। संघर्ष के दौरान दोनों पक्ष लगातार अपनी सैन्य तैयारियों में लगे रहे। युद्धविराम का समय भी दोनों सेनाओं के लिए तैयारी का दौर था और जैसे ही अवसर मिला, सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो गई। मौजूदा हालात में दोनों पक्ष पूरी तरह युद्ध की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।

रिटायर्ड ब्रिगेडियर शारदेंदु ने आशंका जताई कि इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कच्चे तेल की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी शुरू हो चुकी है और शेयर बाजारों में अस्थिरता देखने को मिल रही है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है, ऊर्जा संकट गहरा सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो सकती है। युद्ध के चलते कूटनीतिक वार्ताएं भी प्रभावित होती दिखाई दे रही हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जो संवाद आगे बढ़ रहा था, वह अब पूरी तरह बाधित हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ इजरायल को मिल रहा है, क्योंकि वह नहीं चाहता था कि ईरान और अमेरिका के बीच किसी प्रकार का स्थायी समझौता हो।

उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना है और मौजूदा घटनाक्रम ने उसे सैन्य कार्रवाई का आधार उपलब्ध करा दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले युद्धविराम और 14 सूत्रीय कार्यक्रम का समर्थन किया, लेकिन जैसे ही सैन्य कार्रवाई का अवसर मिला, अमेरिका ने फिर बड़े स्तर पर हमले शुरू कर दिए। ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी आंतरिक एकजुटता है। शीर्ष नेतृत्व पर हुए हमलों के बाद देश के भीतर राष्ट्रीय एकता और मजबूत हुई है और ईरान पूरी मजबूती के साथ युद्ध का सामना कर रहा है। दोनों पक्ष पूरी तैयारी के साथ आमने-सामने हैं और लगातार एक-दूसरे को निशाना बना रहे हैं।

रिटायर्ड ब्रिगेडियर ने आगे कहा कि यह संघर्ष कितना लंबा चलेगा, इसका अनुमान लगाना फिलहाल संभव नहीं है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या दोनों पक्ष शांति वार्ता को एक और अवसर देने के लिए तैयार होते हैं या फिर सैन्य टकराव ही आगे का रास्ता तय करेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी नई रणनीति बनाकर संवाद बहाल करने की दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे, ताकि क्षेत्र को व्यापक युद्ध और उसके वैश्विक दुष्परिणामों से बचाया जा सके।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

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