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जीवन सुरक्षा ग्रुप पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, 5.54 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क, स्कीम की जांच तेज

07:33 PM Jul 10, 2026 IST | News Desk
जीवन सुरक्षा ग्रुप पर ईडी की बड़ी कार्रवाई  5 54 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क  स्कीम की जांच तेज
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गुवाहाटी, 10 जुलाई (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी जोनल कार्यालय ने पीएमएलए, 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए जीवन सुरक्षा ग्रुप ऑफ कंपनीज और उसके निदेशकों की करीब 5.54 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनल अटैचमेंट) किया है। कुर्क की गई संपत्तियों में 48 बैंक खातों में जमा लगभग 1.42 करोड़ रुपए और असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल में स्थित 22 अचल संपत्तियां (जिनकी अनुमानित कीमत 4.11 करोड़ रुपए) शामिल हैं।

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ईडी के अनुसार, यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), एसीबी गुवाहाटी द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) एक्ट, 1978 के तहत दर्ज एफआईआर और आरोप पत्र के आधार पर शुरू की गई थी। मामले की जांच पहले असम सीआईडी और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) भी कर चुके हैं।

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जांच में सामने आया कि जीवन सुरक्षा ग्रुप ने अपनी सहयोगी कंपनियों के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों में फैले एजेंटों और लगभग 422 शाखाओं के नेटवर्क के जरिए एक पोंजी और मनी सर्कुलेशन योजना चलाई। इस नेटवर्क में मुख्य रूप से जीवन सुरक्षा रियल एस्टेट लिमिटेड, जीवन सुरक्षा एसोसिएट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और जीवन सुरक्षा एनर्जी एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड शामिल थीं।

ईडी के अनुसार समूह ने रिकरिंग और फिक्स्ड डिपॉजिट, प्लॉट बुकिंग, उत्पाद आधारित योजनाओं, मासिक आय योजना और रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर जैसी योजनाओं के नाम पर लोगों को अत्यधिक रिटर्न का लालच दिया। एजेंसी का आरोप है कि कंपनी के पास जनता से जमा राशि स्वीकार करने का कोई वैध लाइसेंस या अनुमति नहीं थी।

जांच में पता चला कि समूह ने करीब 6.88 लाख निवेशकों से लगभग 403.63 करोड़ रुपए जुटाए। इनमें से केवल 132.72 करोड़ रुपए ही निवेशकों को लौटाए गए, जबकि शेष राशि का उपयोग नए निवेशकों को आकर्षित करने और योजना को जारी रखने के लिए किया गया। ईडी का अनुमान है कि इस प्रक्रिया से करीब 270.91 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) उत्पन्न हुई।

एजेंसी के अनुसार, निवेशकों से जुटाए गए धन को कंपनी के खातों से निकालकर निदेशकों और उनके परिजनों के व्यक्तिगत खातों में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद नकद निकासी, बीमा पॉलिसियों, फिक्स्ड डिपॉजिट और विभिन्न कंपनियों के बीच लेनदेन के माध्यम से धन की लेयरिंग की गई और अंततः इसे विभिन्न अचल संपत्तियों में निवेश कर दिया गया।

ईडी ने कहा कि कुर्क की गई संपत्तियां कथित अपराध से अर्जित आय का हिस्सा हैं। मामले में धनशोधन के पूरे नेटवर्क, संबंधित व्यक्तियों और संपत्तियों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

एससीएच/वीसी

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

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News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.

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