Explainer! स्टैंडर्ड चार्टर्ड के अर्थशास्त्रियों का अनुमान, RBI जल्द कर सकती है Repo Rate में बढ़ोतरी, जानिए क्या होगा इम्पैक्ट
RBI Repo Rate Hike : अगले महीने होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में संभावना जताई जा रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में इजाफा करे. जानकारी के अनुसार ऐसा अनुमान स्टैंडर्ड चार्टर्ड के अर्थशास्त्रियों ने लगाया है
रेपो रेट बढ़ने का सीधा मतलब है कि होम लोन का महंगा हो जाएगा और फ्लोटिंग दरों पर लोन लेने वालों की EMI भी बढ़ सकती है. हालांकि, जो फिक्स रेट पर लोन लेते हैं उनकी EMI में कोई बदलाव नहीं आता है.
आज गुरुवार को स्टैंडर्ड चार्टर्ड के अर्थशास्त्रियों ने यह अनुमान एक नोट के माध्यम से कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई का खतरा बढ़ने के कारण, भारत का रिजर्व बैंक जून से ही ब्याज दरें बढ़ाना शुरू कर सकता है. बता दें इस समय CRR 5.25 फीसदी (Current Repo Rate) है, यानी अभी केंद्रीय बैंक अन्य बैंकों को इसी दर पर ब्याज दे रहा है.
Reserve Bank of India : क्या है रेपो रेट

रेपो रेट (Repo Rate) वह निश्चित ब्याज दर है, जिस पर देश का केंद्रीय बैंक याने भारतीय रिजर्व कमर्शियल बैंकों को शोर्ट टर्म ब्याज देता है. बैंक इस पैसे का उपयोग अपनी दैनिक ज़रूरतों को पूरा करने या ग्राहकों को लोन देने के लिए करते हैं. स्टैंडर्ड चार्टर्ड के भारत स्थित अर्थशास्त्री अनुभूति सहाय और सौरव आनंद ने अपने नोट में कहा कि वैश्विक यील्ड में बढ़ोतरी और अन्य एशियाई केंद्रीय बैंकों द्वारा दरों में की गई वृद्धि के कारण भी पॉलिसी दरें बढ़ सकती हैं.
बता दें वैश्विक यील्ड (Global Yield) का मतलब किसी अंतरराष्ट्रीय निवेश या परिसंपत्ति (जैसे ग्लोबल बॉन्ड, शेयर या फंड) से एक निश्चित अवधि में मिलने वाले रिटर्न या आय से है, जिसे निवेश के वर्तमान मूल्य के प्रतिशत के रूप में मापा जाता है.
बता दें, पिछले महीने, RBI ने कहा था कि वह इस संघर्ष के कारण होने वाली रुकावटों की अवधि और उनके असर पर नजर रखेगा. भारत के ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप्स अगले 12 महीनों में दरों में 125 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं.
RBI Monetary Policy : गिर रही रुपए की कीमत

इस समय भारत का रुपया तेजी से नीचे गिर रहा है. इस समय डौलर के मुकाबले 96 के ऊपर ही ट्रेड कर रहा है. संभावना जताई जा रही है कि रिजर्व बैंक गिरते हुए रुपये को बचाने के लिए इस तरह का सख्त कदम उठा सकता है,.
यानी RBI रुपये की रक्षा के लिए इस तरह का कदम उठा सकता है. ऐसे में हो सकता है कि 3 से 5 जून के बीच होने वाली मौद्रिक नीति की बैठक में Repo Rate को बढ़ा सकता है.
Indian Rupee Depreciation : रेपो रेट बढ़ने से रुपया पर असर
रेपो रेट बढ़ने से आमतौर पर भारतीय रुपये (INR) को मजबूती मिलती है. जब केंद्रीय बैंक (RBI) रेपो रेट बढ़ाता है, तो देश में ब्याज दरें बढ़ जाती हैं. इससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बॉन्ड और फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज आकर्षक हो जाते हैं, जिससे देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ता है और रुपया मजबूत होता है.
उच्च ब्याज दरें विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश करने के लिए आकर्षित करती हैं. विदेशी मुद्रा की इस आवक (Inflow) से अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपये की मांग बढ़ती है, जिससे यह अन्य मुद्राओं (जैसे अमेरिकी डॉलर) के मुकाबले मजबूत होता है.
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