W3Schools
For the best experience, open
https://m.punjabkesari.com
on your mobile browser.
Advertisement

यादों में बालासुब्रमण्यम : जिनकी आवाज के लिए एमजीआर ने रोक दी थी फिल्म की रिकॉर्डिंग

08:29 PM Jun 03, 2026 IST | News Desk
यादों में बालासुब्रमण्यम   जिनकी आवाज के लिए एमजीआर ने रोक दी थी फिल्म की रिकॉर्डिंग
Advertisement

नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। कल्पना कीजिए कि कोई गायक सुबह रिकॉर्डिंग स्टूडियो में प्रवेश करता है और रात जब बाहर निकलता है, तो उसके नाम 21 पूरी तरह से रिकॉर्ड किए गए गाने होते हैं। यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि 8 फरवरी 1981 को बेंगलुरु में रचा गया एक ऐसा इतिहास है, जिसे महान गायक श्रीपति पंडिताराध्युला बालासुब्रमण्यम (एसपीबी या बालु) ने संगीतकार उपेंद्र कुमार के लिए कन्नड़ गीतों की रिकॉर्डिंग के दौरान सच कर दिखाया था। उन्होंने एक दिन में 19 तमिल और 16 हिंदी गाने रिकॉर्ड करने का भी बेजोड़ कीर्तिमान स्थापित किया।

Advertisement

4 जून 1946 को नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) के एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में जन्मे बालासुब्रमण्यम के पिता एस. पी. सांबामूर्ति एक 'हरिकथा' कलाकार थे। पिता चाहते थे कि 'बालु' इंजीनियर बने। पिता की इच्छा का मान रखते हुए उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की, लेकिन टाइफाइड के कारण पढ़ाई छूटी, तो वे मद्रास (चेन्नई) चले आए।

Advertisement

वर्ष 1969 में तमिल सिनेमा के महानायक एम. जी. रामचंद्रन (एमजीआर) अपनी फिल्म 'अदिमै पेन' के गाने 'आयिरम निलावे वा' की रिकॉर्डिंग के लिए एस. पी. बालासुब्रमण्यम का इंतजार कर रहे थे। ऐन वक्त पर एस. पी. बालासुब्रमण्यम बीमार पड़ गए। हैरान करने वाली बात यह थी कि एमजीआर ने लगभग एक महीने तक फिल्म की रिकॉर्डिंग रोक दी ताकि एस. पी. बालासुब्रमण्यम ठीक हो सकें और वही इस गाने को गाएं। यह एस. पी. बालासुब्रमण्यम की प्रतिभा का ही जादू था कि उनके ठीक होने के बाद रिकॉर्ड हुआ यह गाना मील का पत्थर साबित हुआ।

15 दिसंबर 1966 को तेलुगु फिल्म 'श्री श्री श्री मर्यादा रमन्ना' के गीत 'एमिये विंत मोहम' से करियर की शुरुआत करने वाले एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने संगीत की कोई औपचारिक शास्त्रीय शिक्षा नहीं ली थी। इसके बावजूद, जब वर्ष 1980 में निर्देशक के. विश्वनाथ ने विशुद्ध कर्नाटक संगीत पर आधारित फिल्म 'शंकराभरणम' के गीतों को गाने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी, तो शास्त्रीय संगीत के दिग्गजों को संशय था।

लेकिन संगीतकार के. वी. महादेवन के निर्देशन में एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने 'ओंकारा नाधानु' जैसी अत्यंत जटिल बंदिशों को अपने सुगम संगीत के माधुर्य के साथ ऐसा गाया कि उन्हें अपना पहला सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का 'राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार' मिला।

वर्ष 1981 में जब एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने के. बालचंदर की फिल्म 'एक दूजे के लिए' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा, इस फिल्म के गाने 'तेरे मेरे बीच में, कैसा है ये बंधन अंजाना' ने उन्हें दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया।

इसके बाद, बालु बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान की परदे पर गूंजने वाली आधिकारिक आवाज बन गए। 'मैंने प्यार किया' (1989) का 'दिल दीवाना' हो या 'हम आपके हैं कौन…' (1994) में लता मंगेशकर के साथ गाया गया कालजयी गीत 'दीदी तेरा देवर दीवाना'।

डबिंग की दुनिया में वे कमल हासन की तेलुगु आवाज बन चुके थे। फिल्म 'दशावतारम' (2008) में कमल हासन के 10 अलग-अलग किरदारों में से 7 को एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने अपनी आवाज की विविधता से जीवंत किया था। इसके अलावा उन्होंने हॉलीवुड अभिनेता बेन किंग्सले के लिए फिल्म 'गांधी' के तेलुगु संस्करण में भी डबिंग की।

भारत सरकार ने उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2001 में पद्मश्री, 2011 में पद्म भूषण और वर्ष 2021 में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया। आंध्र प्रदेश सरकार ने उन्हें रिकॉर्ड 25 बार नंदी पुरस्कारों से नवाजा।

5 सितंबर 2020 को चेन्नई के एमजीएम अस्पताल में एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने अंतिम सांस ली। उनकी अटूट विरासत को सम्मान देते हुए, 15 दिसंबर 2025 को हैदराबाद के रवींद्र भारती में देश के दिग्गजों की उपस्थिति में उनकी एक कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया।

--आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

Advertisement
Author Image

Advertisement
Advertisement
×