भारत की दलहन पर व्यापार नीति भरोसेमंद होनी चाहिए

 कनाडा की राय में दाल दलहनों पर भारत की व्यापार नीति ‘सुसंगत और पारदर्शी’ होनी चाहिए। कनाडा के एक दलहन उत्पादक प्रांत के कृषि मंत्री ने बृहस्पतिवार को यह राय प्रकट की।
 कनाडा, भारत दालों के प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है। कनाडा के सबसे बड़े दलहन प्रांत सस्कतशेवान के कृषि मंत्री डेविस मैरिट ने भारतीय दलहन एवं आज संघ (आईपीजीए) के द्वारा आयोजित पांचवें दलहन सम्मेलन में कहा कि हमने हाल में कुछ आयात शुल्कों की वजह से कठिनाई का सामना किया है।
 नीति में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का दीर्घकालिक प्रभाव होता है। हमारे पास एक सुसंगत और पारदर्शी व्यापार नीति होनी चाहिए।
 मैरिट ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि दालों के आयात पर भारत द्वारा लगाए गए व्यापार प्रतिबंधों के चलते उनके प्रांत को चीन, जापान, संयुक्त अरब अमीरात और बांग्लादेश जैसे अन्य बाजारों को तलाशने पर मजबूर होना पड़ा है।
 आईपीजीए के अध्यक्ष जीतू भेडा ने दाल दलहन की ‘लचीली’ व्यापार नीति पर जोर दिया ताकि आपूर्ति में बार बार की कमी और कुछ किस्म की दालों के दामों में तेज उछाल की समस्या से बचा जा सके।
 भारत, अफ्रीका और म्यांमार से सालाना लगभग 7,00,000 टन अरहर दाल का आयात करता है। भारत बड़े पैमाने पर कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीकी देशों से दालों का आयात करता है।
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