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तीसरी लहर को रोकना जरूरी...

हम सब पहली और दूसरी लहर देख चुके हैं। दूसरी लहर ने तो इतना कहर बरपाया कि हमने बहुत से अपनों को खोया। जो दर्द, तकलीफ अपनों को खोने की है वो कभी भी भुलाई नहीं जा सकती। वो कभी पूरी नहीं हो सकती।
तीसरी लहर को रोकना जरूरी...
हम सब पहली और दूसरी लहर देख चुके हैं। दूसरी लहर ने तो इतना कहर बरपाया कि हमने बहुत से  अपनों को खोया। जो दर्द, तकलीफ अपनों को खोने की है वो कभी भी भुलाई नहीं जा सकती। वो कभी पूरी नहीं हो सकती। यही नहीं दूसरी लहर ने सबके कानों को हाथ लगवा दिये थे और समझा दिया था कि जीवन है तो सब कुछ है। सेहत है तो जहान है। सब सख्ती से पालन कर रहे थे, परन्तु जैसे हम कोरोना की दूसरी लहर से उभर रहे हैं लोगों के व्यवहार में फिर बदलाव शुरू हो रहा है। अभी कि सबको मालूम है कि यह वायरस आसानी से जाने वाला नहीं है। लॉकडाउन और सभी सुरक्षा के उपाय करते हुए आज दिल्ली में कोरोना संक्रमण दर 0.1 है। वहीं ठीक होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। विभाग के अनुसार दिल्ली में कोरोना के एक्टिव केस 657 हैं, परन्तु दूसरी तरफ महाराष्ट्र और केरल में केस बढ़ रहे हैं। हमारे प्रधानमंत्री भी इस बारे में चिंतित हैैं। उन्होंने कहा कि यह वाकई हम सबके लिए गम्भीर चिंता का विषय है।
हम सब मानते हैं हम पिछले डेढ़-दो साल से घर बैठे या वर्क फ्राेम होम करते तंग आ गए हैं। बहुत मुश्किल है और कइयों का रोजगार चला गया है। वो और भी मुश्किल जिन्दगी थम सी गई है। इसलिए बहुत से लोग घर से ऐसे निकल रहे हैं कि जो होगा देखा जाएगा-सड़क पर फिर मारामारी, ट्रैफिक, हर स्थान पर भीड़। यहां तक कि हिल स्टेशनों पर जो भीड़ दिख रही है वो तो बहुत ही चिंता का विषय है। सबको चेतावनी भी है कि तीसरी लहर की मार सहनी बहुत मुश्किल होगी और यह छोटे बच्चों पर भी असर करेगी, परन्तु फिर भी लोगों को समझ नहीं आ रही। अब तो डब्ल्यूएचओ ने भी चेतावनी जारी कर दी है कि भारत में तीसरी लहर कभी भी आ सकती है, इसलिए हमें सभी को सम्भलना जरूरी है। हमें सुरक्षा के नियमों के साथ जीने की आदत डालनी पड़ेगी, तब कहीं हम जाकर बच पाएंगे। सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना, हाथों को सैनेटाइज करते रहना तो हमारा लाइफ स्टाल हो जाना चाहिए। यानी जैसे हम रोजमर्रा की जिन्दगी जीते हैं, सुबह उठना, ब्रश करना, नहाना, पूजा करना, खाना खाना, काम करना यह जरूरी है वैसे यह भी जरूरी होना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सबको गांवों, शहरों में बुजुर्गों, युवाओं और आने वाले समय में बच्चों को वैक्सीनेशन लग जानी चाहिए और जैसे आधार कार्ड पर एक देश से दूसरी देश में घूमने के लिए पासपोर्ट, वीजा जरूरी है वैसे ही सबके पास टीके का स​िर्टफिकेट या उनके व्हाट्सएप पर या ई-मेल पर होना चाहिए ताकि जैसे चैकिंग होती है उस तरह हर शहर, गांव में चैकिंग टीम हो। वो जो भी व्यक्ति सड़क पर, काम पर, रेस्टोरेंट, माल्स, बस  या हिल स्टेशन पर है उनकी चैकिंग होनी चाहिए। वो ही व्यक्ति बाहर निकले जिसके टीका लग चुका है। उससे उसकी भी सुरक्षा होगी और दूसरों की भी क्योंकि टीका लगने के बाद भी कोरोना तो हो सकता है परन्तु जानलेवा नहीं। यानी सबके पास जैसे एक ड्राइवर के पास ड्राइविंग लाइसेंस होता है, वैसे ही सबको घर से बाहर घूमने के लिए, काम पर जाने के लिए वै​क्सीनेशन कार्ड होना जरूरी है। भीड़ समाप्त करने का यही तरीका है। हम अक्सर मुसीबत समाप्त होने पर सुधरते हैं। तीसरी लहर से बचने का और सम्भलने का यही समय आैर तरीका है। हमें तीसरी लहर को हर हालत में रोकना होगा।
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