It’s My Life (5)

इंग्लैंड के एक और धमाकेदार बल्लेबाज Dannis Amiss को Minna ने एक शार्ट लैंथ फ्लिपर मारा और Amiss वहीं खड़े के खड़े ही रह गए। गेंद पैड पर लगी और Leg Before Wicket Out करार दे दिए गए। यह विकेट मैंने अहमदाबाद, जालन्धर और नागपुर में इंग्लैंड के विरुद्ध मैचों में लिए। अन्त में पटौदी लिखते हैं मैंने अपने जीवनकाल में किसी लैग स्पिनर की इस कदर अभूतपूर्व Bowling Performance नहीं देखी। 

Selectors को अब जल्द से जल्द Minna को चन्द्रशेखर की जगह भारत की Test Team में डाल कर चांस देना चाहिए। क्रिकेट का जमाना बदल रहा था। बेदी, प्रसन्ना के पेट लगभग निकल आए थे। बेदी तो देश के साथ एक तरह से धोखा कर रहा ​था। हालांकि उस समय वो भारत की टेस्ट टीम का कप्तान था। अधिकतर खिलाड़ियों के अनुसार वह रोज रात आधी से ज्यादा Rum की बोतल पीता था। 

फिर अपने जूनियर्स को गालियां देता था, बदतमीजी की हदें पार करता था और पावर के नशे में चूर ग्राऊंड में भी टीम Spirit पैदा करने की बजाय अपनी मनमानी करता था। टीम के खिलाड़ी बताते थे कि वह सीनियर खिलाड़ियों को रोज अपने कमरे में बुलाकर उन्हें भी जबरदस्ती शराब पिलाता था और क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से ज्यादा पैसे लेने के मुद्दे पर सभी खिलाड़ियों को भड़काता था। प्रसन्ना और चन्द्रशेखर शरीफ लोग थे लेकिन उम्र उनकी बढ़ रही थी। प्रसन्ना का पेट लगभग 5 इंच बाहर लटकता था।

Minna द्वारा ली गईं कुछ प्रमुख विकटें
पाठक एक इसी उदाहरण से अंदाजा लगा सकते ​हैं कि ईरानी ट्राफी मैच नागपुर में मैं, बेदी और प्रसन्ना जब दिलीप वैंगसरकर को गेंद डाल रहे थे तो दिलीप ने 186 रन बनाए थे। जिसमें बेदी और प्रसन्ना पर छक्कों और चौकों की बौछार कर दी, जबकि मुझे उसने एक भी चौका या छक्का नहीं मारा। अगले दिन के Times of India के Front Page पर Irani Trophy में Ranji Champion Bombay और Rest of India के इस मैच की Coverage पर Times के Sports Correspondent ने लिखाः-

Dalip Vengsarkar was facing two test experienced Bedi and Prasanna Spinners and Minna was playing his first biggest match. When Vengsarkar made 184 runs he was thrashing Bedi and Prasanna every second ball hitting them outside the boundry, he dare not hit Minna. उस Sports Story का Heading  था: “It was between Minna and Vengsarkar!”
एक कहावत हैः- सामान सौ बरस का और पल की खबर नहीं

मैंने सोचा था अब मैं टेस्ट क्रिकेट खेलूंगा। पैसे तो खैर उस समय बहुत कम मिलते थे लेकिन मैं सोचता था कि अपनी गेंदबाजी की तकनीक से मैं न केवल भारत बल्कि विश्व के सभी क्रिकेट खेलने वाले देशों में नाम कमाऊंगा लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। भारत की टीम का वेस्ट इंडीज का दौरा होने जा रहा था। मेरा नाम उस दौरे के लिए इंडियन टीम के बम्बई में लगे स्वर्गीय भूतपूर्व भारतीय कप्तान हेमु अधिकारी के कोचिंग कैंप में आ गया। मुझे लगने लगा कि अब इंडियन टेस्ट टीम में वेस्ट इंडीज के विरुद्ध खेलने से मुझे कोई नहीं रोक सकता। आखिर मेरी गेंदबाजी के शिकारों की एक लम्बी लाईन थी।

टोनी ग्रेग (इंग्लैंड कप्तान), सुनील गावस्कर (भारतीय कप्तान), डैनिस एमिस, ऐलन नार, क्रिस ओल्ड, डैरक रैंडल, कपिल देव (भारतीय कप्तान), दलीप वैंगसरकर, अंशुमन गायकवाड़, संदीप पाटिल, ब्रिजेश पटेल, गुंडप्पा विश्वनाथ, सैयद किरमानी, दलीप मैंडिस (श्रीलंका कप्तान), मदन लाल, अशोक मांकड, एकनाथ सोलकर।

श्रीलंका के तीन मैचों में 12 विकेट और न जाने कितने ही टेस्ट क्रिकेटर, दलीप ट्राफी और रणजी ट्राफी के नामी बल्लेबाज अब तो इतने नाम भी याद नहीं। ऐसा लगा अब मुझे भारतीय टेस्ट कैप मिल कर ही रहेगी। वो ब्लेजर भी मिलेगा जिस पर चक्र के ऊपर लिखा होगा “India”.
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