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जल बोर्ड मुख्यालय तोड़फोड़ मामला, अदालत पहुंचे राघव चड्ढा

दिल्ली जल बोर्ड के मुख्यालय में हुई तोड़फोड़ के मामले में जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
जल बोर्ड मुख्यालय तोड़फोड़ मामला, अदालत पहुंचे राघव चड्ढा
दिल्ली जल बोर्ड के मुख्यालय में हुई तोड़फोड़ के मामले में जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अदालत को आरोपित भाजपा नेता और दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष आदेश गुप्ता, योगेन्द्र चंदोलिया (भाजपा नेता), रवि तंवर (उपाध्यक्ष, करोल बाग भाजपा) विकास तंवर और कुछ अन्य बीजेपी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के खिलाफ सेक्शन 156(3) के तहत आवेदन दिया है। राघव चड्ढा ने कहा, जांच प्रक्रिया में सुस्ती और महामारी एक्ट के सेक्शन में दर्ज हुई एफआईआर से निराश होकर, असरदार जांच और जांच की निगरानी के लिए उन्होंने मजिस्ट्रेट की अदालत से अपील की है। 
राघव चड्ढा ने कहा कि, 24 दिसंबर को दिल्ली के झंडेवालान में मौजूद दिल्ली जल बोर्ड के मुख्यालय, वरुणालय में दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में तोड़फोड़ की इस शर्मनाक घटना को अंजाम दिया गया था। इसके बाद जांच की प्रक्रिया में सुस्ती और निष्क्रियता को देखने के बाद सीआरपीसी के सेक्शन 156(3) के तहत कोर्ट में आवेदन दिया है। कोर्ट से अपील की है कि कोर्ट इसमें हस्तक्षेप करे और पुलिस अधिकारियों द्वारा की जा रही जांच की निगरानी कराए। जांच की निगरानी के लिए दिए गए आवेदन में कहा गया है कि, दिल्ली जल बोर्ड में तोड़ फोड़ और उपद्रव की इस अपमानजनक और भयावह घटना में दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष आदेश गुप्ता, योगेन्द्र चंदोलिया (भाजपा नेता), रवि तंवर (उपाध्यक्ष, करोल बाग भाजपा) विकास तंवर और कुछ अन्य बीजेपी नेताओं के साथ 200-250 कार्यकर्ता शामिल थे, जिन्होंने दिनदहाड़े दिल्ली जल बोर्ड के मुख्यालय में इस गंभीर अपराध को अंजाम दिया। 
राघव चड्ढा के मुताबिक, हिंसा की घटना ने दिल्ली पुलिस की ओर से संदिग्ध निष्क्रियता के कारण ज्यादा जोर पकड़ लिया। दिल्ली पुलिस सिर्फ मूकदर्शक बनी ये सब कुछ देखती रही, जब दंगाई भीड़ ने कहर बरपाया और अवैध रूप से दिल्ली जल बोर्ड मुख्यालय पर हमला किया। दिल्ली जल बोर्ड की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। बोर्ड के अधिकारियों को काम करने में बाधा उत्पन्न की। इन सब के बावजूद संबंधित अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण चिन्हित आरोपियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसलिए, 156(3) के तहत कोर्ट में आवेदन कर के निष्पक्ष जांच के अधिकार के तहत कोर्ट से ये मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की जांच कोर्ट की निगरानी में निश्चित समयसीमा के भीतर हो। अन्य राहत के अलावा, अभियुक्तों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई और उनके सीडीआर लोकेशन सहित महत्वपूर्ण साक्ष्य के उचित अधिग्रहण के लिए आवेदन के जरिए से मांग की गई है। 
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