JK Education Department Suspension: LG का बड़ा एक्शन! शिक्षा विभाग के 8 अधिकारी सस्पेंड, विवादित किताबों पर भी चला सख्त डंडा
जम्मू-कश्मीर से एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। दरअसल शिक्षा विभाग में सामने आई अनियमितताओं और विवादित किताबों के इस्तेमाल को लेकर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। बता दें, कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (LG Manoj Sinha Action) के निर्देश पर 8 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच कराने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?

जारी आदेश के अनुसार निलंबित किए गए अधिकारियों में शिक्षा विभाग के अलग-अलग पदों पर कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं। इनमें लाइब्रेरी कोऑर्डिनेटर, असिस्टेंट कोऑर्डिनेटर, प्रिंसिपल, अकादमिक ऑफिसर और लेक्चरर स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
ये अधिकारी जम्मू, कठुआ, बडगाम, किश्तवाड़ और पुंछ जैसे कई जिलों में तैनात थे। सरकार ने सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने उच्च स्तरीय जांच का फैसला लिया है। पावर डेवलपमेंट विभाग के वित्तीय आयुक्त अश्वनी कुमार को जांच अधिकारी बनाया गया है। वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव रोहित शर्मा को प्रेजेंटिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरे मामले की जांच करके 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपें। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने अपने आदेश में साफ किया है कि निलंबन अवधि के दौरान सभी अधिकारी स्कूल शिक्षा विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में रहेंगे। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे विभाग के नियमों के अनुसार ही कार्य करेंगे और उन्हें प्रशासन द्वारा तय निर्देशों का पालन करना होगा। इस कार्रवाई के दौरान समग्र शिक्षा योजना में कार्यरत एक संविदा कंप्यूटर सहायक की सेवाएं भी तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। सरकार का मानना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है, इसलिए संबंधित कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है।
विवादित किताबों पर सरकार का सख्त फैसला

सरकार ने विवादित पुस्तकों को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। जिन लेखकों और प्रकाशकों की किताबों को लेकर विवाद हुआ था, उन्हें जम्मू-कश्मीर में ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इसके अलावा उनकी प्रकाशित सभी पुस्तकों और अन्य सामग्री को तुरंत वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि छात्रों तक केवल सही और मानकों के अनुसार तैयार की गई अध्ययन सामग्री ही पहुंचे।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर जोर
सरकार की इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में शिक्षा विभाग में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होती है, तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार आगे भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
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