Kashmir Terror Operation: कश्मीर में आतंकियों पर शिकंजा कसने की तैयारी, सेना प्रमुख ने जवानों को समझाई पूरी रणनीति
Kashmir Terror Operation: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के बदलते स्वरूप के बीच सुरक्षा बलों ने अपनी तैयारियां और मजबूत करने पर जोर दिया है। इसी सिलसिले में थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने कश्मीर घाटी के कई संवेदनशील इलाकों का दौरा किया और जमीन पर सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति को करीब से समझा। उन्होंने जवानों और अधिकारियों से मौजूदा चुनौतियों की जानकारी ली और कहा कि सुरक्षा बलों को हमेशा खतरे से एक कदम आगे रहते हुए तुरंत और सटीक जवाब देने की क्षमता बनाए रखनी होगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, थलसेना प्रमुख ने उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) से सटे अग्रिम क्षेत्रों का दौरा किया। यह इलाका सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां उन्होंने सैनिकों की तैनाती, निगरानी व्यवस्था और ऑपरेशनल तैयारियों की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने मध्य कश्मीर के बडगाम समेत घाटी के दूसरे हिस्सों में भी सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। सेना प्रमुख के दौरे का एक अहम हिस्सा श्रीनगर स्थित चिनार कोर के राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर मुख्यालय में हुआ, जहां आतंकवाद विरोधी अभियानों की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई पर जोर
सेना प्रमुख ने सुरक्षा बलों से कहा कि बदलते आतंकी खतरे के बीच केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय संभावित गतिविधियों का पहले से अनुमान लगाना जरूरी है। इसके लिए खुफिया जानकारी को मजबूत करने और उसके आधार पर लक्षित कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने उन्हें अलग-अलग इलाकों में सुरक्षा स्थिति, आतंकियों की गतिविधियों और संभावित खतरों से जुड़ी जानकारी दी। साथ ही आतंकियों की पहचान, उनके ठिकानों का पता लगाने और उनके मंसूबों को नाकाम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में भी बताया।
सुरक्षा बलों का ध्यान अब LoC से लगे इलाकों के साथ-साथ पीर पंजाल पर्वतमाला के दुर्गम और घने जंगलों पर भी है। इन इलाकों में आतंकियों के छिपने या आवाजाही करने की आशंका को देखते हुए तलाशी और निगरानी अभियान चलाए जा रहे हैं। बडगाम के युसमर्ग इलाके में इसी महीने चलाए गए एक अभियान के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी। इस कार्रवाई के बाद जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में निगरानी को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल जरूरी
थलसेना प्रमुख ने आतंकवाद के खिलाफ अभियान में सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को अहम बताया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। उनका कहना था कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर सूचना साझा होने से संभावित खतरे की पहचान समय रहते की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई संभव होगी।
दौरे के दौरान थलसेना प्रमुख ने जवानों की पेशेवर क्षमता, प्रतिबद्धता और ऑपरेशनल तैयारियों की सराहना की। आतंकवाद विरोधी अभियानों में साहस और उत्कृष्ट सेवा के लिए चयनित कुछ जवानों को सम्मानित भी किया गया।उन्होंने सुरक्षा बलों से स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में संतुलित व समन्वित कार्रवाई जारी रखने को कहा।

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