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जम्मू-कश्मीर : मनोज सिन्हा ने अस्पताल पहुंच कर फारूक अब्दुल्ला की सेहत की जानकारी ली

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को श्रीनगर स्थित एसकेआईएमएस अस्पताल जाकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की सेहत की जानकारी ली जो कोविड-19 का इलाज करा रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर : मनोज सिन्हा ने अस्पताल पहुंच कर फारूक अब्दुल्ला की सेहत की जानकारी ली
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को श्रीनगर स्थित एसकेआईएमएस अस्पताल जाकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की सेहत की जानकारी ली जो कोविड-19 का इलाज करा रहे हैं। सिन्हा ने अस्पताल में अब्दुल्ला के बेटे एवं नेकां के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की और एसकेआईएमएस अस्पताल के डॉक्टरों को श्रीनगर से सांसद अब्दुल्ला को बेहतरीन चिकित्सा उपलब्ध करने के निर्देश दिए। 
उपराज्यपाल कार्यालय ने ट्वीट किया, ‘‘श्रीनगर में, मैंने सौरा क्षेत्र स्थित एसकेआईएमएस में उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। फारूक अब्दुल्ला साहब की सेहत की जानकारी ली और डॉक्टरों को बेहतरीन इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए, मैं उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।’’ उपराज्यपाल ने बेहतर निगरानी और इलाज के लिए अब्दुल्ला को अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की भी पेशकश की। 
उपराज्यपाल कार्यालय ने ट्वीट किया, ‘‘ मैंने फारूक साहब को, जो इस समय एसकेआईएमएस में भर्ती हैं, बेहतर निगरानी और इलाज के लिए अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की पेशकश भी की।’’ उमर अब्दुल्ला ने अस्पताल आने और उनके पिता एवं नेकां अध्यक्ष को दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करने की पेशकश करने पर सिन्हा का आभार व्यक्त किया। 
उन्होंने कहा कि एसकेआईएमएस अस्पताल में उनके पिता को यथासंभव बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है। उमर ने ट्वीट किया, ‘‘मनोज सिन्हा जी अस्पताल आकर मेरे पिता की सेहत की जानकारी लेने के लिए धन्यवाद। हम, मेरे पिता को दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करने की पेशकश करने के लिए आभारी हैं। एसकेआईएमएस श्रीनगर के डॉक्टर और कर्मी सबसे बेहतर पेशवरों में से हैं और मेरे पिता को यथासंभव बेहतरीन इलाज मुहैया कराया जा रहा है।’’ 
गौरतलब है कि गत मंगलवार को 85 वर्षीय अब्दुल्ला के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। शुरुआत में उन्हें घर पर ही पृथक-वास में रखा गया था लेकिन शनिवार को डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करने का फैसला किया। 


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