जम्मू-कश्मीर : सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश, इंटरनेट पर प्रतिबंध की तत्काल हो समीक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 के उल्लंघन के बाद जम्मू-कश्मीर में स्थिति पर याचिकाओं के एक बैच पर फैसला सुनाते हुए कहा कि कश्मीर में बहुत हिंसा देखी है। हम सुरक्षा के मुद्दे के साथ मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को संतुलित करने की पूरी कोशिश करेंगे। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 144 का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है, बेहद जरूरी हालात में ही इंटरनेट को बंद किया जा सता है। SC ने कहा कि धारा 144 को अनंतकाल के लिए नहीं लगा सकते हैं, इसके लिए जरूरी तर्क होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह तुरंत ई-बैंकिंग और ट्रेड सर्विस को शुरू करे।

राज्य सरकार की ओर से जो फैसले सार्वजनिक किए जाएंगे, उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया है। जो सरकार के फैसलों का रिव्यू करेगी और 7 दिन के अंदर अदालत को रिपोर्ट सौपेंगी।

सरकारी स्रोत: रक्षा मंत्रालय के प्रमुख जनरल बिपिन रावत की अध्यक्षता में सैन्य मामलों के नव-निर्मित विभाग के तहत दो संयुक्त सचिव, 13 उप सचिव और 22 अवर सचिव होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार की स्थिति पर याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा एक सप्ताह के भीतर सभी प्रतिबंधात्मक आदेशों की समीक्षा करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर में स्थिति पर याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा इसमें कोई संदेह नहीं है कि लोकतांत्रिक तरीके से बोलने की स्वतंत्रता एक आवश्यक उपकरण है। इंटरनेट का उपयोग अनुच्छेद 19 (1) के तहत एक मौलिक अधिकार है a) मुक्त भाषण



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