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झारखंड प्रोटेस्ट : 98 फीसदी मांगों पर सहमति के बाद भी गतिरोध कायम, सीबीआई जांच और CGL रद्द करने पर फंसा मामला

झारखंड सरकार द्वारा 98 प्रतिशत मांगें मानने के बावजूद जेपीएससी और जेएसएससी छात्रों का आंदोलन जारी है। छात्र पूरी भर्ती प्रक्रिया की सीबीआई जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के लिखित आदेश पर अड़े हुए हैं।
08:41 PM Aug 10, 2026 IST | Rohit Singh
झारखंड सरकार द्वारा 98 प्रतिशत मांगें मानने के बावजूद जेपीएससी और जेएसएससी छात्रों का आंदोलन जारी है। छात्र पूरी भर्ती प्रक्रिया की सीबीआई जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के लिखित आदेश पर अड़े हुए हैं।
झारखंड प्रोटेस्ट   98 फीसदी मांगों पर सहमति के बाद भी गतिरोध कायम  सीबीआई जांच और cgl रद्द करने पर फंसा मामला
source : social media

Jharkhand Students Protest : झारखंड सरकार और राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं (JPSC और JSSC) में गड़बड़ी के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्रों के बीच खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है।

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सरकार का दावा है कि उसने प्रदर्शनकारी युवाओं की करीब 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार कर ली हैं। इनमें 14वीं JPSC पीटी (PT) परीक्षा रद्द करने से लेकर विवादित एजेंसी TDPL की जांच कराने तक के फैसले शामिल हैं। इसके बावजूद आंदोलनकारी छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

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छात्र मुख्य रूप से पूरी प्रक्रिया की CBI जांच कराने और JSSC-CGL परीक्षा को औपचारिक रूप से रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं, लिखित आदेश न मिलने के कारण छात्रों का आज विधानसभा मार्च के बाद भी रांची में प्रदर्शन जारी है।

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सरकार ने मानीं ये प्रमुख मांगें:

2 बड़ी परीक्षाएं रद्द: 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और ACF परीक्षा को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया गया है।

एजेंसी और पैसों की जांच: विवादों में घिरी TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं की जांच का फैसला लिया गया है। वहीं, वित्तीय गड़बड़ियों की जांच ईडी (ED) से कराने की सिफारिश की गई है।

सिस्टम में सुधार के लिए कमेटी: भविष्य में पारदर्शी परीक्षाएं कराने के लिए IIM, IIT-ISM और XLRI जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के एक्सपर्ट्स की एक सुधार समिति बनाने का प्रस्ताव है।

यहां अटका है असली पेच

CBI जांच की मांग: छात्र पूरे भर्ती मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच चाहते हैं, जबकि सरकार फिलहाल इसके लिए राजी नहीं दिख रही है।

JSSC-CGL परीक्षा का विवाद: छात्र 2024 की JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने पर अड़े हैं। सरकार का तर्क है कि यह परीक्षा कोर्ट के गाइडलाइंस के तहत हुई थी और नियुक्तियां बांटी जा चुकी हैं, इसलिए इसे रद्द करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

लिखित आदेश की जिद: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो और प्रदर्शनकारी केवल मौखिक वादों से संतुष्ट नहीं हैं। वे सभी बिंदुओं पर स्पष्ट लिखित नोटिफिकेशन की मांग कर रहे हैं।

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Rohit Singh

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रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।

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