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JPSC-JSSC घोटाला : CID जांच में खुला सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा, 12 लाख में बिके सवाल और 15 लाख में इंटरव्यू

झारखंड JPSC-JSSC परीक्षा घोटाले में CID जांच से बड़ा पर्दाफाश हुआ है। JSSC CGL का पेपर लीक कर 12-12 लाख में सवाल बेचे गए, जबकि जेपीएससी इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने के नाम पर 15-15 लाख रुपये वसूले गए थे।
01:41 PM Aug 11, 2026 IST | Rohit Singh
झारखंड JPSC-JSSC परीक्षा घोटाले में CID जांच से बड़ा पर्दाफाश हुआ है। JSSC CGL का पेपर लीक कर 12-12 लाख में सवाल बेचे गए, जबकि जेपीएससी इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने के नाम पर 15-15 लाख रुपये वसूले गए थे।
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SOURCE : SOCIAL MEDIA

Jharkhand Paper Leak News : झारखंड में JSSC CGL और जेपीएससी भर्ती परीक्षाओं में हुए कथित घोटाले को लेकर CID की तफ्तीश में नए खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि JSSC CGL परीक्षा का पेपर लीक कर बोकारो में उम्मीदवारों को परीक्षा से ऐन पहले 65 सवाल रटवाए गए थे।

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दूसरी ओर, जेपीएससी इंटरव्यू में मनचाहे नंबर बढ़ाने के एवज में अभ्यर्थियों से 15-15 लाख रुपये की मोटी रकम वसूली गई। इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश गिरफ्तार आरोपी अभय तिवारी के कबूलनामे से हुआ है, जिसने आयोग के पूर्व अध्यक्ष, सदस्यों, बिचौलियों और कोचिंग संचालकों के एक बड़े सिंडिकेट की पोल खोलकर रख दी है।

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12 लाख में प्रश्न पत्र

सीआईडी को दिए गए बयान में टीडीपीएल (TDPL) के तत्कालीन मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने बताया कि बोकारो में 15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये वसूले गए थे। यानी कुल 1.80 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। परीक्षा से ठीक पहले इन उम्मीदवारों को 65 सवाल और उनके जवाब याद कराए गए थे। इस दौरान प्रश्न पत्र छापने वाली एजेंसी 'वेबेल' का मालिक मिथिलेश सिंह और उसका सहयोगी राकेश सिंह भी वहां मौजूद थे।

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हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी अभय तिवारी खुद इस परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल कर गोड्डा में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर बन बैठा था। इतना ही नहीं, उसने अपने भाई अक्षय तिवारी और भावज सुषमा कुमारी को भी इसी धांधली के जरिए सरकारी नौकरी दिलवाई।

शुरुआत में बायोमेट्रिक का काम TDPL के पास था, लेकिन रेट कम होने के कारण उसने काम छोड़ दिया। बाद में जब टेंडर 'वेबेल' कंपनी को मिला, तब अभय ने वेबेल के मालिक और खूंटी के उमाकांत प्रमाणिक के साथ मिलकर पेपर लीक का पूरा ताना-बाना बुना।

सीआईडी पूछताछ में जेपीएससी की 11वीं और 13वीं परीक्षा में धांधली का पूरा रेट कार्ड भी सामने आया है:

प्रारंभिक परीक्षा (PT): सामान्य वर्ग के लिए 5 लाख रुपये और एससी-एसटी उम्मीदवारों के लिए 2 से 3 लाख रुपये।

फाइनल सेलेक्शन: प्रति अभ्यर्थी 60 से 70 लाख रुपये।

इंटरव्यू में सेटिंग: मनमुताबिक नंबर दिलाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15-15 लाख रुपये तय थे। आदित्य पांडेय नाम के कोचिंग संचालक ने भी कई अभ्यर्थियों को इस सिंडिकेट से जोड़ा था।

आयोग के बड़े चेहरों की भूमिका

अभय के मुताबिक, इस नेटवर्क में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते, पूर्व सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा, डॉ. जमाल अहमद, टीडीपीएल निदेशक रामवीर सिंह और पतंजलि कोचिंग के रवि कुमार शामिल थे। इंटरव्यू की रकम डॉ. अजिता का पीए ब्रजराम वसूलता था, जबकि पूर्व अध्यक्ष के हिस्से की राशि मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय का कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र लेता था।

इस सिंडिकेट के जरिए रिश्वत देकर नंबर बढ़वाने वालों में 3 डीएसपी और 1 उप कारापाल भी शामिल हैं। इसके अलावा सीडीपीओ परीक्षा में भी 10-10 लाख रुपये में सेटिंग कराकर बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों का चयन कराया गया था।

यह भी पढ़ें - JPSC भर्ती मामले में बड़ा एक्शन! पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते को CID ने किया गिरफ्तार

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Rohit Singh

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रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।

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