CBI जांच की मांग पर SC सख्त, झारखंड सरकार और केंद्र को नोटिस जारी
SC on JPSC : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 2025 कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा में धांधली का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत पहुंच गया है। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ 3 जजों की बेंच सुनवाई कर रही है।
बेंच ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और जेपीएससी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिसको लेकर वे एक महीने से अधिक समय से सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता की सुप्रीम कोर्ट में दलील
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि राज्य सरकार ने गड़बड़ी की बात मानते हुए परीक्षा रद्द की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उस फैसले पर स्टे लगा दिया। ऐसे में निष्पक्षता के लिए पूरे मामले की जांच CBI या सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज को सौंपी जानी चाहिए।
हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने साफ कहा कि किसी पूर्व न्यायाधीश को जांच का जिम्मा नहीं दिया जा सकता, क्योंकि यह एक जटिल मामला है जिसमें फॉरेंसिक जांच और तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल की जरूरत है, जो केवल कोई जांच एजेंसी ही कर सकती है।
डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग
हरिशरण देवगन द्वारा दायर इस जनहित याचिका में मांग की गई है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुए भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए मूल ओएमआर शीट, सीसीटीवी फुटेज और सर्वर ऑडिट लॉग जैसे डिजिटल साक्ष्यों को तुरंत सुरक्षित किया जाए।
झारखंड में पिछले लंबे समय से जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में धांधली को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा चरम पर है। अब सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद यह तय होगा कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाएगी या नहीं।
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