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जरा ध्यान से... कहीं देर न हो जाए

हम सब कोरोना की दो लहर का कहर सह चुके हैं। दूसरी लहर ने तो सबको हिला कर रख दिया। हमने बहुत से अपनों को खोया। बहुत से बच्चों ने अपने मां-बाप को खोया।
जरा ध्यान से... कहीं देर न हो जाए
हम सब कोरोना की दो लहर का कहर सह चुके हैं। दूसरी लहर ने तो सबको हिला कर रख दिया। हमने बहुत से अपनों को खोया। बहुत से बच्चों ने अपने मां-बाप को खोया। किसी ने भाई, किसी ने बेटा-बेटी और किसी का सुहाग गया। किसी की पत्नी गई, कई परिवारों में एक के बाद एक कई मौतें हुईं। जिसके चलते लॉकडाउन भी जरूरी था परन्तु हम सबको यह भी मालूम होना चाहिए कि लॉॅकडाउन जरूरी तो है क्योंकि महामारी ऐसी है परन्तु लोगों की आर्थिक हालत कैसे डगमगा जाती है, यानी पटरी से ही उतर जाती है। कइयों की नौकरियां चली गईं, काम रुक गए, बिजनेस ठप्प हो गए, यानी चारों तरफ एक डर, भय और आर्थिक तंगी भी है।
अब जब लॉकडाउन खुला है तो जनता ने हद ही कर दी। फिर वही बाजारों में भीड़, सड़कों पर भीड़। ऐसा लगता है कुछ हुआ ही न हो। कहीं लोग मास्क के बगैर हैं। यह सब भूल रहे हैं कि अभी ​तीसरी लहर का डर सिर पर मंडरा रहा है फिर भी लोग नियम तोड़ रहे हैं। अरे जरा ध्यान से देर न हो जाए। जब तक आप सब सम्भले देर न हो जाए। मैं मानती हूं कि सभी लोग हताशा से तंग आ चुके हैं। घर बैठकर ​आर्थिक तंगी से लोग जूझ रहे हैं और घर रहकर लोग ऊब चुके हैं परन्तु हैल्थ इज वैल्थ या जान है तो जहान है। हम मानते हैं कि लॉकडाउन खोलना जरूरी था परन्तु सभी को नियम नहीं तोड़ने चाहिए। हम मिलकर ​तीसरी लहर को आने से रोक सकते हैं यानि आए भी तो हमें इतनी तैयारी से रहना है, यानी सबसे पहले तो हमें यह देखना है कि सबको टीका लगना जरूरी है। दूसरा टीका लगने के बाद भी सबको मास्क पहन कर रहना है, 6 गज की दूरी रखनी जरूरी है, हाथ सैनेटाइज करने भी जरूरी हैं। अगर हम सब पालन करते हैं तो तीसरी लहर क्या उसके बाद कोई भी लहर आए तो हम उससे कम से कम नुक्सान से निकल जाएंगे। क्योंकि हमारे देश में जनसंख्या बहुत है। यही नहीं बाजारों और दूसरी जगहों पर कोरोना से बचाव के नियमों को लेकर जनता की बेफिक्री पर दिल्ली हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। शुक्रवार को मामले का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा कि करोना से जुड़े दिशा-निर्देशों का उल्लंघन ऐसे ही जारी रहा तो तीसरी लहर आने में वक्त नहीं लगेगा। वाकयी हमने कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी कीमत चुकाई है। जब हम भीड़भाड़ की ऐसी तस्वीरें देखते हैं तो चिंता स्वाभाविक है। हाईकोर्ट ने अथारिटीज से कहा है कि बड़े कदम उठाएं। अदालत ने केन्द्र, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। केन्द्र और राज्य सरकार से कहा कि वे दुकानदारों को जागरूक करें। इस बीच मेडिकल एक्सर्ट्स के अनुसार अक्तूबर तक भारत में तीसरी लहर आ सकती है।
इसलिए हमें ध्यान से रहना है, कहीं देर न हो जाए, इसलिए जिनका वर्क फ्रॉम होम है, वो जारी रखें। जिनका बहुत जरूरी है वो ही निकलें, सर्विस करने वाले नौकरी पर जाएं परन्तु अपनी सुरक्षा के साथ यानी मास्क, दूरी बनाकर रखना जरूरी है। हालांकि भारत सरकार और दिल्ली सरकार तीसरी लहर से निपटने के लिए हर सम्भव उपाय कर रही हैं। अगर हम सब पहले ही परहेज कर लें तो दुर्घटना नहीं घटेगी। मुझे मालूम है बच्चे यानी स्टूडेंट्स घर में बैठकर आनलाइन क्लास करके ऊब चुके हैं। उनकी माएं थक गई हैं, क्योंकि बच्चों से उनका बचपन छिन रहा है। दोस्तों से ​मिलना, कक्षा में कुछ सीखना, लंच ब्रेक में लंच करना, प्ले ग्राउंड में खेलना, सब इस महामारी ने छीन लिया है। बु​द्धिमता इसी में है कि हम अपने आप को कम से कम एक साल और बचा कर रखें तो यह खतरा टल जाएगा और हम और हमारे बच्चे लोगों को इस महामारी को एक बैड हिस्ट्री कहकर सुनाएंगे कि कैसे हमने डटकर मुकाबला किया, बाकी फिर वही-जन्म, मरण, लाभ, हानि, सब विधि हाथ है।
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