कर्नाटक : रंगकर्मी ने संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार लेने से मना किया

बेंगलुरु : कर्नाटक के प्रख्यात रंगकर्मी एस रघुनंदना ने बृहस्पतिवार को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार स्वीकार करने से इनकार कर दिया। यह पुरस्कार उन्होंने ‘लोगों की पीट-पीटकर हत्या और भगवान तथा धर्म के नाम पर होने वाली ‘हिंसक’ घटनाओं के विरोध में और सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवाज को दबाने के प्रयास के खिलाफ अस्वीकार किया है। 

एक बयान में रघुनंदना ने कहा कि जब ईमानदार लोगों के खिलाफ ‘अन्याय’ किया जा रहा है तो वह ऐसे में पुरस्कार स्वीकार नहीं कर सकते हैं। पुरस्कार की घोषणा होने के दो दिन बाद उन्होंने कहा, ‘‘ मेरी अंतरात्मा, मेरे अंतर्यामी मुझे अनुमति नहीं देते हैं।’’ उन्होंने पुरस्कार लेने से इनकार करने के लिए माफी मांगते हुए कहा कि एक कवि और नाटक लेखक होने के नाते वह पुरस्कार स्वीकार नहीं कर सकते हैं क्योंकि देश में अच्छे लोगों के साथ देश के नाम पर अन्याय हो रहा है। 

हालांकि उन्होंने इस पुरस्कार के लिए धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी एक स्वायत्त संस्था है और रहेगी। यह पूरी तरह से लंबे समय से स्वायत्तता के अपने सिद्धांतों को बचाये हुए है। कलाकार ने कहा, ‘‘ आज भगवान और धर्म के नाम पर लोगों की पीट-पीटकर हत्या की जा रही है और हिंसा हो रही है। यहां तक कि कौन क्या खाता है, इसको लेकर भी ऐसा हो रहा है। सत्ता प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर हत्या और हिंसा के लिए जिम्मेदार है।’’ 
उन्होंने ऐसी व्यवस्था बनाए जाने के प्रयास पर भी अपनी चिंता व्यक्ति की ‘ जो उच्च शिक्षा से लेकर स्कूल और कॉलेजों में हर जगह विद्यार्थियों को घृणा और अतार्किकता का पाठ पढ़ाती है।’ 

कलाकार ने कहा कि भारतीय होने और वसुधैव कुटुम्बकम की पूरी भावना को ही तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है और उसे समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके जैसे करोड़ो लोग इस पर दुखी ही हो सकते हैं। रघुनंदना ने आरोप लगाया कि सामाजिक कार्यकर्ताओं और विवेकशील बुद्धिजीवी लोगों की आवाज को दबाकर देश के शासकों ने गरीब और शक्तिहीन लोगों को चुप कराने का निर्णय लिया है। 

उन्होंने कहा कि यह स्थिति हमेशा से रही है चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो या कोई भी सत्ता में हो। कलाकार ने इन बुद्धिजीवियों को असली देशभक्त बताते हुए कहा कि यही वे लोग हैं जो मूल्यों की रक्षा के लिए सही रास्ते पर चल रहे हैँ। उन्होंने कहा, ‘‘ यह विरोध नहीं है, यह निराशा से आया है और पुरस्कार स्वीकार नहीं करने की लाचारी से। मैं अकादमी का सम्मान करता हूं और उन सभी का जिन्होंने अभी और पहले पुरस्कार स्वीकार किया है। अकादमी के सदस्यों का शुक्रिया अदा करता हूं और उनसे माफी मांगता हूं।” 
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