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कोरोनावायरस महामारी के बीच हरे रंग के अंडे दे रही हैं यहां की मुर्गियां, देखकर वैज्ञानिक भी हुए हैरान

कोरोनावायरस महामारी के बीच हरे रंग के अंडे दे रही हैं यहां की मुर्गियां, देखकर वैज्ञानिक भी हुए हैरान
अकसर आपने बाहर से अंडा सफेद और जर्दी पिली रंग की अंदर से होती है। लेकिन हरे रंग के जर्दी वाला अंडा आजकल खूब सुर्खियों में बना हुआ है। वैज्ञानिक भी इन अण्डों को देखकर बहुत हैरान हैं। केरल के मल्लारपुरम में कोरोना संकट के बीच सामने आये हैं। 


दरअसल हरी जर्दी वाले अंडे यहां एक फार्म में मुर्गियां दे रही हैं। इन अण्डों को खरीदने से लोग डर रहे हैं। इस पर शोध वैज्ञानिक कर रहे हैं। इसके पीछे की जो वजह साथ ही फार्म के प्रमुख ने बताई और हैरान करने वाली वह वजह है। 

हरी जर्दी वाले अंडे दे रही हैं 7 मुर्गियां


केरल के मल्लापुरम के कोट्टाकल में स्थित शिहाबुद्दीन पॉल्‍ट्री फार्म का यह मामला बताया जा रहा है और हरी जर्दी वाले अंडे लगभग 7 मुर्गियां देती हैं। अन्य मुर्गियों से थोड़ा इन मुर्गियों का साइज भी अलग होता है। हमेशा ही देखा गया है की सामान्य अंडों की जर्दी पीली होती है। लेकिन ये मुर्गियां हरे रंग की जर्दी वाले अंडे पिछले 9 महीने से दे रही हैं। इतना ही नहीं फार्म के मालिक शहाबुद्दीन ने चौंकाने वाली बात बताई कि सामान्‍य रंग के चूजे इन हरी जर्दी वाले अंडों से निकले हैं। 

शोध कर रहे वैज्ञानिक


सोशल मीडिया पर हरे रंग के अंडों की तस्वीर जमकर वायरल हो रही हैं। लोग भी इन तस्वीरों को देखकर चौंक गए हैं। इस पर शोध करने के लिए केरल वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी (KVASU) के वैज्ञानिक फार्म पर पहुंचे। एक अध्ययन शुरू विशेष मुर्गियों और अंडों पर उन्होंने शुरू किया। इस मामले में शिहाबुद्दीन ने कहा कि एक मुर्ग द्वारा बिछाये गये अंडे में 9 महीने पहले हरे रंग की जर्दी थी। इसका सेवन उसके परिवार ने किया, क्योंकि इसे सुरक्षित नहीं मान रहे थे। उसके बाद हरे अंडे देना शुरू नए मुर्गियों ने भी देना शुरू कर दिया था।

खान-पान का प्रभाव हो सकता है 


एक यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने इस मामले में कहा कि मुर्गियों को किस तरह का खाना हरे रंग के अंडों से स्पष्ट होता है कि दिया जाता है। शिहाबुद्दीन से उस खाने की जानकारी वैज्ञानिकों ने ली जिस वजह से जिसे वह मुर्गियों को देता था। ऐसा खाना देने से वैज्ञानिकों ने उसे मना किया। फिर जर्दी का रंग पीला दो हफ्ते बाद होने लगा। शहाबुद्दीन ने बताया कि मुर्गियों के खानपान के कारण ऐसा हो सकता है। इस पर जांच वैज्ञानिक कर रहे हैं। 
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