जानिए वजन कम करने के लिए एक दिन में कितनी रोटी खानी चाहिए

वैसे कुछ भी हो मगर भारतीय खाना रोटी के बिना बिल्कुल अधूरा है। यह भी एक कारण है कि सब्जी बेशक कोई भी क्यों न बनी हो लेकिन उसके साथ जब तक रोटी न हो तो खाना का अधूरा सा लगता है। हर एक व्यक्ति की रोटी खाने की क्षमता अलग-अलग होती है,लेकिन अगर आप भी वेट लॉस करने की सोच रहे हैं तो उस स्थिति में आपको कितनी रोटी का सेवन करना  चाहिए आज हम आपको इसके बारे में विस्तारपूर्वक बताएंगे।


1.एक रोटी से यह आहार मिलता है 

गेंहू के आटे से बनी रोटी मैक्रो-नूट्रीएन्ट रिच होती है। इसमें प्रोटीन और फाइबर की भी काफी अच्छी मात्रा पाई जाती है। यदि मनुष्य 1 रोटी 6 इंच की खाता है तो उसके शरीर को इससे करीब 15 ग्राम काब्र्स,3 ग्राम प्रोटीन और 0.4 फाइबर मिलता है। 


2.इतनी रोटी है जरूरी

कितनी रोटी का सेवन करना चाहिए इस बात का काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि आपके शरीर को कितने काब्र्स की जरूरत है। दूध,सोडा,चीनी,ऑइल जैसी चीजों से भी काब्र्स शरीर में चले जाते हैं। ऐसे में यदि आपकी डाइट में इन सभी चीजों की मात्रा अधिक है तो ज्यादा अच्छा है कि रोटी का इनटेक कम रखें। 


3.करना हो वेट लॉस 

यदि आप भी वजन कम करना चाहते हैं तो इसके लिए आप कितनी रोटी का सेवन करें यह जानना सबसे ज्यादा जरूरी है। क्योंकि रोटी की मात्रा महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए अलग-अलग होती है। 


ऐसी महिलाएं जिनका डाइट प्लान दिन में 1400 कैलरीज लेने का है उन्हें दो रोटी दोपहर के समय और दो रोटी रात के समय खानी चाहिए। वहीं अगर पुरुषों का डाइट प्लान 1700 कैलरीज का है तो उन्हें अपने लंच और डिनर में तीन रोटी का सेवन करना चाहिए। 


4.भोजन करना कब सही 

वैसे तो रोटी को लंच या डिनर में कभी भी खाया जा सकता है लेकिन एक्सपर्ट की मानें तो रोटी का सेवन दिन के समय करना सबसे अच्छा होता है। दरअसल रोटी में पाए जाने वाला फाइबर इसके पचने के प्रोसेस को धीरे कर देता है। 


रात के समय रोटी खाने पर सोने के बाद इसको पचने की क्रिया चलती रहती है जो बॉडी के लिए ठीक नहीं मानी जाती है। वहीं रोटी अगर दिन के समय खाई जाए तो पूरे दिनभर एक्टिविटी की वजह से यह आसानी से पच जाती है। 


5.चावल से अच्छी है रोटी

रोटी चावल से अच्छा विकल्प है। दरअसल रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है जिससे की पेट ज्यादा देर तक भरा हुआ रहता है और पाचन क्रिया के वक्त ब्लड शुगर लेवल भी आराम-आराम से प्रभावित होता है।


वहीं चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है जिस वजह से यह जल्दी से पच जाता है जो लब्ड शुगर लेवल को तेजी से इफेक्ट करता है। कहीं न कहीं यही स्थिति डायबीटीज के पेशेंट्स के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है। 




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