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आइए जड़ों की ओर लौटें

आइए जड़ों की ओर लौटें
कोरोना महामारी की दवा बनाने के लिए दुनिया भर की नामी कम्पनियां काम कर रही हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देश की दवाइयों के ट्रायल शुरू कर चुके हैं। इसी बीच बंगलादेश के डाक्टरों ने दावा किया है कि उन्होंने कोरोना वायरस की दवा खोज ली है और इस दवा के इस्तेमाल से मरीजों में कोरोना के लक्षण तीन दिन में ठीक हो गए और मरीज चार दिन में पूरी तरह ठीक हो गए। भारत में कोरोना के उपचार के लिए बंगलादेश से एंटी वायरल ड्रग रेमडेसिविर आयात करने की कोशिशों के बीच देश की ड्रग्स नियामक संस्था ने कहा है कि वह अवैध रूप से किसी भी सप्लाई को रोकेगा। सैंट्रल ड्रग्स स्टेंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन का कहना है कि अभी तक बंगलादेश में भी कम्पनियों को इसकी स्वीकृति नहीं दी गई तो फिर इसका आयात कैसे किया जा सकता। अभी तो नियामक भारत में जैनरिक दवाओं के निर्माताओं द्वारा तैयार रेमडेसिवर की गुणवत्ता और प्रदर्शन की परख कर रहा है। नियामक का फोकस गैर मान्यता प्राप्त सप्लायरों से इसका आयात रोकना है। दरअसल रेमडेसिवर की मांग तब बढ़ी जब ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया डा. वी.जी. सोमानी ने गीलीड साइसेंज को इसकी सप्लाई की अनुमति प्रदान की। यह वह फर्म है जिसने रेमडेसिवर को डिवैल्प किया है। इसके आयात की मंजूरी मुम्बई की कलीनेरा ग्लोबल सर्विस को भी दी गई। 13 जून के इंडियन कौंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने रेमडेसिविर के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश जारी किये। अभी तक इसका आयात शुरू नहीं हुआ है।
किसी भी दवा के इस्तेमाल की मंजूरी उसकी परख के बाद  ही दी जाती है। बंगलादेश की दवाई से कितने रोगी ठीक हुए, इस संबंध में कोई प्रामाणिक सबूत नहीं है। ऐसा दावा तो किया जा रहा है कि बंगलादेश की दवाई उपचार में काफी मददगार साबित हो रही है। कुछ रोगियों के रिश्तेदार भी कूरियर सेवाओं से इसे मंगा भी चुके हैं। बंगलादेश के डाक्टरों का दावा है कि उन्होंने कुछ दवाओं के मिश्रण से यह दवा तैयार की है। एक अलग दावे में कहा गया था ​िक बंगलादेश में कीड़े मारने वाली दवा से तैयार एक औषधि से भी कोरोना मरीज ठीक हो रहे हैं।
दुनियाभर में तमाम दावों के बीच कोरोना को हराने के लिए बहुत सारी आैषधियों का प्रचार शुरू हो चुका है। खासतौर पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए कई तरह के ब्रांड सामने आ चुके हैं। फूड सप्लीमैंट्स बनाने वाली कम्पनियां अपने उत्पादों का जबरदस्त प्रचार करने में लगी हैं।
सवाल यह है कि मार्किट में बिकने वाले ब्रांडों पर कितना भरोसा किया जाए, क्योंकि बाजार में उपलब्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर कई तरह की आशंकाएं हैं। लोगों को चाहिए कि कोरोना के दौर में आयुष्मान मंत्रालय द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों पर चलें और उनके द्वारा स्वीकृत उत्पादों का ही प्रयोग करें। खुद अपने शरीर पर कोई भी प्रयोग जीवन के लिए घातक हो सकता है। शरीर में एंटीबाडीज बनाने के लिए खुद कोई प्रयोग न करें बल्कि सतर्कता से काम लें। भारत में आयुर्वेद और  यूनानी  चिकित्सा पद्धतियों पर काफी अनुसंधान हो चुका है। 
प्राचीन ऋषि-मुनियों ने आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा की हर विद्या को ग्रंथों में लिखा है। हमारे वेद इससे भरे पड़े हैं। महर्षि  चरक संहिता भी काफी लोकप्रिय है। अगर हम आयुर्वेद का संस्कृत से अनुवाद करें तो मूल शब्द आयुर का अर्थ होता है दीर्घ आयु और वेद का अर्थ होता है विज्ञान आयुर्वेद पर सबसे पुराने ग्रंथ चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और आष्टांग हृदय है। यह ग्रंथ अंतरिक्ष में पाए जाने वाले पांच तत्वों पृथ्वी, आकाश, जल, वायु और अग्नि जो हमारे व्यक्तिगत तंत्र पर प्रभाव डालते हैं उसके बारे में बताते हैं।
भारत की तरह बंगलादेश में भी आयुर्वेद चिकित्सा काफी समृद्ध है। ऐसा नहीं है कि कोरोना के उपचार की दवा केवल नामीगिरामी बहुराष्ट्रीय दवा कम्पनियां ही ढूंढ सकती हैं। बंगलादेश के भी स्वास्थ्य वैज्ञानिकों का शोध भी कामयाब हो सकता है। इसलिए बंगलादेश की दवा का ट्रायल भारत को अपने यहां करना चाहिए अगर उससे मरीज ठीक होते हैं या वह दवा उपचार में मददगार साबित होती है तो उसके इस्तेमाल की मंजूरी दे देनी चाहिए। अंधेरे में हाथ-पांव मारने से कोई फायदा नहीं। सब कुछ मानवीय ट्रायल ही प्रभावित करेंगे। भारतीयों को भी चाहिए वह प्राचीन जीवन शैली अपनाएं और अपनी जड़ों की ओर लौटें। शरीर की राेग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए सब कुछ भारतीयों के रसोईघर में मौजूद हैं तो फिर दूसरों से उम्मीद करना फिजूल है।
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com
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