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वांगचुक की आवाज सुने देश

वांगचुक की आवाज सुने देश
आमिर खान स्टारर फिल्म थ्री-इडियट का लीड करैक्टर फुनसुख वांग्डू तो आप सबको याद ही होगा। दरअसल यह करैक्टर शिक्षाविद्, वैज्ञानिक और इंजीनियर सोनम वांगचुक से प्रेरित था। आमिर खान ने इस करैक्टर को बाखूबी निभाया था। सोनम वांगचुक पिछले कई वर्षों से लद्दाख के इलाके में ​सक्रिय हैं। वे स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमैंट ऑफ लद्दाख के नाम से मूवमेंट भी चलाए हुए हैं। वह लगातार शिक्षा में सुधार के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने सरकारी स्कूल व्यवस्था में सुधार लाने के लिए सरकार, ग्रामीण समुदायों और नागरिक समाज के सहयोग से 1994 में ‘आपरेशन न्यू होप’ भी चलाया था। उन्हें एसईसीएम ओएल का परिसर डिजाइन करने के लिए भी जाना जाता है जो पूूरी तरह सौर ऊर्जा पर आधारित है।
लद्दाख में भारत-चीन तनातनी के बीच सोनम वांगचुक फिर हैडलाइन्स में हैं। चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने खुद सोनम वांगचुक का उल्लेख एक लेख में किया है। इस लेख में कहा गया है कि सोनम वांगचुुक, जिनके काम को थ्री-इडियट फिल्म में सराहा गया, वीडियो पोस्ट करके भारतीयों से चीनी सामान का बहिष्कार करने की बात कर रहे हैं। ऐसा वह भारतीय राष्ट्रवादी ताकतों के उकसाने पर कर रहे हैं। दरअसल चीन को वांंगचुक के एक बयान से काफी मिर्ची  लगी है, जिसमे उन्होंने लद्दाख में भारत-चीन सैनिकों में तनातनी के बीच चीन को सबक सिखाने के ​लिए सेना की तैनाती और बुलेट नहीं वॉलेट का मंत्र दिया था।
उन्होंने भारतीयों से चीन में बने सामान का बहिष्कार करने की अपील करते हुए कहा था कि चीन के खिलाफ  युुद्ध भारतीय सेना के अलावा लोगों द्वारा चाइनीज कम्पनियों के बायकॉट से भी जीता जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि चीन के बने सामानों का एक सप्ताह में सॉफ्टवेयर और एक साल में हार्डवेयर का बहिष्कार करें। चीन का कहना है कि इस तरह का अभियान भारत के​ लिए घाटे का सौदा है। उसने सोनम वांगचुक द्वारा जारी किए गए रीमूव चाइनीज ऐप नाम की एप्लीकेशन को लेकर भी कड़ी आपत्ति जताई है। चीन दुनिया की बड़ी ताकत है। भारत के एक शिक्षा सुधारक के आह्वान पर चीन की इस तरह की प्रतिक्रिया देने से स्पष्ट है कि वह वांगचुक की अपील से डरा बैठा है।
प्रसिद्ध योग गुरु बाबा रामदेव ने भी मोबाइल फोन से चीन की एप्लीकेशन डिलीट करने के अभियान का समर्थन कर दिया है। उन्होंने भारतीयों से स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया है और भारतीयों को भारतीय ऐप इस्तेमाल करने की अपील की है। पैट्रियाट पीपुल्स फ्रंट आफ असम ने भी सोनम वांगचुक के स्वर में स्वर मिला दिए हैं।
चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित लेख को लेकर भारत के छोटे व्यापारियों ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्हें चीन की इस बात पर कड़ी आपत्ति है कि भारत के पास चीनी उत्पादों के बहिष्कार की हैसियत नहीं। छोटे व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का कहना है कि चीन ने भारत के स्वाभिमान को ललकारा है, जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। कैट ने दस जून से शुरू होने वाले भारतीय सामान-हमारा अभियान काे अधिक तीव्रता से चलाने का संकल्प लिया है। व्यापारियों ने दिसम्बर 2021 तक चीन से एक लाख करोड़ रुपए का आयात कम करने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी आत्मनिर्भरता हासिल करने का नारा बुलंद किया है। स्वदेशी अभियान भारत के लिए कोई नया नहीं है परन्तु समस्या यह है कि घर-घर में चीनी उत्पाद किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। चीन ने भारत में 6 अरब डालर से भी ज्यादा का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कर रखा है जबकि पाकिस्तान में उसका निवेश 30 अरब डालर से भी ज्यादा है।
थिंक टैंक गेटवे हाउस ने भारत में ऐसी 75 कम्पनियों की पहचान की है जिनमें चीन ने निवेश कर रखा है। तकनीकी क्षेत्र में निवेश की प्रकृति के कारण चीन ने भारत का बाजार कब्जाया हुआ है। भारत और चीन के द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन से स्पष्ट होता है कि भारतीयों को चीनी उत्पाद अपनाने की आदत हो चुकी है। पिछले वर्ष करीब 90 अरब डालर के व्यापार में दो-तिहाई भारत में चीनी निर्यात का था।
चीनी उत्पादों का पूरी तरह बहिष्कार किया जाना सम्भव तो नहीं लेकिन उन्हें कम तो किया ही जाना चाहिए। कोरोना महामारी के बीच अगर भारत को आत्मनिर्भर बनना है तो शुद्ध देसी उत्पादों को अपनाना ही होगा। देसी उत्पादों की मांग बढ़ेगी तो निर्माताओं को उत्पादन बढ़ाना होगा। इसके लिए उन्हें अधिक श्रम की जरूरत पड़ेगी। लोगों को नौकरियां मिलेंगी और अर्थव्यवस्था गति पकड़ेगी। भारत एक विशाल बाजार है, चीन चाह कर भी भारत को नजरंदाज नहीं कर सकता। कोरोना महामारी फैलने के बाद भारत समेत पूरी दुनिया में चीन के प्रति गुस्सा है। इस समय लोगों में राष्ट्रवादी भावनाएं जोर मारने लगी हैं। इस समय देश में स्मार्टफोन बाजार दो लाख करोड़ रुपए का है और चीन की ​हिस्सेदारी 72 फीसदी है। दूरसंचार उपकरणों, होम अप्लायंसेज बाजार, टेलिविजन बाजार, फार्मा सैक्टर में चीन छाया हुआ है।  चीनी उत्पादों से छुटकारा पाना अभी दूर की कौड़ी है, लेकिन हर भारतीय अगर संकल्प ले कि हमने देश को अात्मनिर्भर बनाना है तो यह सब सम्भव है। एक-एक भारतीय को वांगचुक की आवाज को सुनना होगा और उसका मंतव्य समझना होगा। चीनी उत्पादों पर निर्भरता छोड़नी होगी। कम से कम व्यापार असंतुलन तो दूर करना ही होगा।
­आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com
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