सरोजनीनगर में “महापुरुष सम्मान मॉडल” की गूंज, MLA डॉ. राजेश्वर सिंह ने की योगी सरकार की सराहना
Lucknow News: लखनऊ के सरोजनीनगर क्षेत्र से विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रदेश सरकार के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें महापुरुषों की प्रतिमाओं के उन्नयन और उनके सम्मान पर जोर दिया गया है। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता, न्याय और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। डॉ. सिंह ने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र सरोजनीनगर में पिछले एक वर्ष से इसी सोच के साथ लगातार काम किया जा रहा है।
गांव-गांव में महापुरुषों की प्रतिमाओं को बेहतर बनाने और उनके आसपास के क्षेत्रों का सौंदर्यीकरण करने का अभियान चलाया गया है। विशेष रूप से डॉ. भीमराव अंबेडकर की 20 से अधिक प्रतिमाओं का नवीनीकरण किया गया है। इससे न सिर्फ इन महान व्यक्तित्वों के प्रति सम्मान बढ़ा है, बल्कि लोगों में जागरूकता भी आई है।
Lucknow News: ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण
उन्होंने यह भी बताया कि सरोजनीनगर में स्थित महाराजा बिजली पासी किले के पुनरुद्धार का एक बड़ा प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह पहल क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने का काम करेगी।
महापुरुषों के सम्मान में बने प्रमुख स्थल
डॉ. सिंह के अनुसार, सरोजनीनगर आज महापुरुषों के सम्मान और उनकी विरासत को सहेजने में एक उदाहरण बनता जा रहा है। क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण स्थलों का निर्माण और विकास किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
- भगवान परशुराम की भव्य प्रतिमा
- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा
- पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की प्रतिमा
- गुरु नानक द्वार का निर्माण
जल्द बनने वाले नए स्मारक
आने वाले समय में क्षेत्र में कई और महत्वपूर्ण स्मारक स्थापित किए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:
- महाराणा प्रताप द्वार
- रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा
- अवंती बाई लोधी की प्रतिमा
- उदा देवी पासी की प्रतिमा
समाज के लिए प्रेरणा का संदेश
डॉ. राजेश्वर सिंह का कहना है कि महापुरुष किसी एक वर्ग या समुदाय के नहीं होते, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। उनका सम्मान करना हमारी संस्कृति और मूल्यों का हिस्सा है।
सरकार की पहल से बढ़ेगी एकता
उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह पहल पूरे उत्तर प्रदेश में एक बड़े अभियान का रूप लेगी। इससे समाज में एकता, सम्मान और प्रेरणा की भावना मजबूत होगी और लोग अपने इतिहास और परंपराओं से और अधिक जुड़ पाएंगे।
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