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मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने के लिए अलग जमीन देने का निर्देश, धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच मुस्लिम समुदाय को भोजशाला परिसर के बिल्कुल बगल में स्थित खसरा नंबर 596 (जिसे दरगाह की जमीन बताया गया है) पर नमाज पढ़ने की अनुमति दे।
04:49 PM Jul 30, 2026 IST | Bhawana Rawat
धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच मुस्लिम समुदाय को भोजशाला परिसर के बिल्कुल बगल में स्थित खसरा नंबर 596 (जिसे दरगाह की जमीन बताया गया है) पर नमाज पढ़ने की अनुमति दे।
मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने के लिए अलग जमीन देने का निर्देश  धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
Supreme Court on Bhojshala Case

धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मुस्लिम पक्ष को राहत दी है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि शुक्रवार की नमाज के लिए भोजशाला परिसर के बिल्कुल बगल में एक जगह दी जाएं। इसके साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार को इस आदेश का सख्ती से पालन करने और वहां सभी जरूरी व्यवस्थाएं करने के लिए कहा है।

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नमाज के लिए अलग जमीन देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच खसरा नंबर 596 वाली जमीन, जिसे दरगाह की जमीन बताया गया है, उसपर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाएं। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को इस व्यवस्था के लिए इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।

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मुस्लिम पक्ष ने दायर की थी याचिका

सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर की गई अर्जी पर दिया गया है। अर्जी में नमाज के लिए विवादित परिसर के पास ही वैकल्पिक जगह देने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि मौजूदा व्यवस्था के कारण श्रद्धालुओं को नमाज पढ़ने के लिए विवादित स्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

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धार्मिक अधिकारों की रक्षा करना राज्य सरकार का कर्तव्य- SC

सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार के वकील के.एम. नटराज ने कहा कि सरकार दो पक्षों के विवाद में नहीं पड़ना चाहती और उसका मुख्य ध्यान सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार को उसकी जिम्मेदारी याद दिलाई। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने साफ कहा कि "शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा करना भी राज्य सरकार का ही संवैधानिक कर्तव्य है।"

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Bhawana Rawat

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भावना रावत पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम की खबरें लिखने में रुचि है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं।

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