2 महीने तक बच्चों को चोरी की ट्रेनिंग,18 साल होते ही कर देता था बाहर! जबलपुर में पकड़ा गया ट्रेन में चोरी कराने वाले गैंग का मास्टरमाइंड
Jabalpur Train Theft Gang Busted: मध्य प्रदेश के जबलपुर एक हैरान कर देने वाले मामले की चर्चा जोरो पर है। दरअसल यहां एक ऐसे गिरोह का मास्टरमाइंड गिरफ्तार हुआ है, जो नाबालिग बच्चों को क्राइम की ट्रेनिंग देकर ट्रेनों में चोरी करवाता था। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) द्वारा पकड़े गए इस मास्टरमाइंड की पहचान 40 वर्षीय नितेश कुमार के रूप में हुई है। RPF के मुताबिक, नितेश कुमार जबलपुर का पुराना हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ चोरी, लूट और आर्म्स एक्ट समेत 15 से अधिक मामले दर्ज हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, करीब दो साल पहले हुए एक सड़क हादसे में उसका पैर खराब हो गया था। इसके बाद उसके लिए खुद जाकर वारदात करना मुश्किल हो गया। मिली जानकारी के अनुसार, नितेश लगातार क्राइम से जुड़ी फिल्में और वेब सीरीज देखता था। इसी दौरान उसने नाबालिग बच्चों को अपने गैंग में शामिल करने का तरीका अपनाया। उसका मकसद था कि बच्चे चोरी करें और वह खुद पीछे रहकर पूरे नेटवर्क को चलाता रहे।
गरीब परिवारों के बच्चों को बनाता था निशाना
नितेश पर आरोप है कि उसने मदार टेकरी, हनुमानताल, सिद्धबाबा की पहाड़ी और रेलवे स्टेशन के आसपास रहने वाले गरीब परिवारों के 12 से 16 साल तक के बच्चों को अपना निशाना बनाया। बच्चों को पैसों का लालच दिया जाता था। जांच में ऐसा अनुमान जताया गया है कि इस नेटवर्क में करीब 50 से 70 नाबालिग बच्चे जुड़े हो सकते हैं। RPF अब इन बच्चों की पहचान करने में जुटी है।
बच्चों को सीधे चोरी के लिए नहीं भेजा जाता था। पहले उन्हें करीब दो महीने तक चोरी करने के अलग-अलग तरीके की ट्रेनिंग दी जाती थी। जैसे, सो रहे यात्रियों के बैग से सामान निकालना, भीड़ में मोबाइल और पर्स गायब करना और ट्रेन में मौका देखकर चोरी करना जैसी बातों की ट्रेनिंग दी जाती थी। इसके साथ ही ट्रेन जब आउटर के पास धीमी होती थी, तब सामान लेकर उतरने और भागने की जानकारी भी उन्हें सिखाई जाती थी। लेकिन, इन तरीकों की पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी।
18 साल होते ही बच्चों को कर देता था अलग
बता दें, कि नितेश करीब 10 साल तक रेलवे स्टेशन पर वेंडर के तौर पर काम कर चुका था। इस वजह से उसे ट्रेनों की आवाजाही, स्टेशन के आसपास के इलाकों और रेलवे सुरक्षा सिस्टम की अच्छी जानकारी थी। पुलिस के अनुसार, वह इसी एक्सपीरियंस का इस्तेमाल बच्चों को क्राइम करने के लिए तैयार करने में करता था। गिरोह का सबसे चौंकाने वाला नियम यह था कि बच्चा जैसे ही 18 साल का होता, उसे नेटवर्क से अलग कर दिया जाता था।
आरोप है कि नितेश ऐसा इसलिए करता था क्योंकि नाबालिगों से जुड़े मामलों में कानून की प्रक्रिया अलग होती है।वयस्क होने के बाद पुलिस कार्रवाई और जेल का खतरा बढ़ने के चलते वह बच्चों को गिरोह से हटा देता था। इससे गिरोह का संचालन करने वाले लोगों तक पुलिस के पहुंचने का खतरा भी कम रहता था।
RPF ने शुरू की जांच
17 अगस्त को RPF को मिली गुप्त सूचना के आधार पर नितेश कुमार को गिरफ्तार किया गया। अब एजेंसी गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। साथ ही उन नाबालिग बच्चों की पहचान की जा रही है, जिन्हें चोरी के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
RPF और संबंधित एजेंसियां चोरी के मोबाइल और अन्य सामान खरीदने वाले कबाड़ियों तथा रिसीवरों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। बच्चों को अपराध से बाहर निकालकर उनके पुनर्वास की दिशा में भी कार्रवाई की जा रही है। देकर अपराध की दुनिया में धकेल सकते हैं।
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