W3Schools
For the best experience, open
https://m.punjabkesari.com
on your mobile browser.
Advertisement

पति से तलाक के बिना दूसरी शादी का वादा मान्य नहीं, MP हाईकोर्ट ने रद्द की दुष्कर्म की FIR

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सहमति से बने शारीरिक संबंध को अपराध नहीं माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाहित महिला से झूठे वादे के आधार पर दर्ज कराई गई एफआईआर पूरी तरह निरस्त योग्य है।
08:19 PM Jul 27, 2026 IST | Rohit Singh
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सहमति से बने शारीरिक संबंध को अपराध नहीं माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाहित महिला से झूठे वादे के आधार पर दर्ज कराई गई एफआईआर पूरी तरह निरस्त योग्य है।
पति से तलाक के बिना दूसरी शादी का वादा मान्य नहीं  mp हाईकोर्ट ने रद्द की दुष्कर्म की fir

MP High Court Consent Relationship Verdict : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महिला सहकर्मी से रेप के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि दो बालिग व्यक्ति आपस में सहमति से लंबे समय तक संबंध में रहते हैं, तो बाद में लगाए गए आरोपों के आधार पर इसे अपने आप दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

Advertisement

कोर्ट ने कहा कि अगर महिला पहले से विवाहित है, तो शादी का झूठा वादा देकर संबंध बनाने का तर्क भी सही नहीं ठहरता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने भोपाल निवासी एक केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और निचली अदालत की पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया।

Advertisement

क्या था पूरा मामला?

मामला भोपाल के छोला मंदिर थाना क्षेत्र का है। पीड़ित महिला ने अपने ही सहकर्मी पर आरोप लगाया था कि अक्टूबर 2020 में उसे घर बुलाकर नशीला जूस पिलाया गया और दुष्कर्म किया गया। महिला का यह भी कहना था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर 4 साल तक उसका शारीरिक शोषण किया। इसके बाद आरोपी कर्मचारी ने राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और एफआईआर रद्द करने की याचिका लगाई।

Advertisement

हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के बयानों और दस्तावेजों की गहराई से जांच की। जांच में सामने आया कि जब यह संबंध शुरू हुआ, तब महिला पहले से शादीशुदा थी और उसका एक बच्चा भी था।

महिला को अच्छी तरह पता था कि पति से कानूनी तलाक लिए बिना वह दूसरी शादी नहीं कर सकती। ऐसे में शादी के वादे पर संबंध बनाने का सवाल ही नहीं उठता। इसके अलावा, रिकॉर्ड से साफ है कि महिला ने अपनी मर्जी से लंबे समय तक संबंध बनाए रखे। सुनवाई के दौरान ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे साबित हो कि आरोपी ने कोई धमकी दी, ब्लैकमेल किया या तस्वीरों व वीडियो का गलत इस्तेमाल किया।

अदालत ने माना कि पहली नजर में दुष्कर्म का मामला नहीं बनता, जिसके बाद आरोपी को बड़ी राहत देते हुए केस खत्म कर दिया गया।

यह भी पढ़ें - बेटी के बर्थडे पार्टी के बहाने बुलाया, 17 साल की नाबालिग से पुलिसकर्मी ने किया दुष्कर्म, साथी ने बेटे संग दिया पहरा

Advertisement
Author Image

Rohit Singh

View all posts

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।

Advertisement
Advertisement
×