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महाराष्ट्र एटीएस ने ठाणे से कानपुर हत्याकांड में शामिल विकास दुबे के दो साथियों को किया गिरफ्तार

महाराष्ट्र एटीएस ने ठाणे से कानपुर हत्याकांड में शामिल विकास दुबे के दो साथियों को किया गिरफ्तार
महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने दुर्दांत अपराधी विकास दुबे के दो फरार सहयोगियों को महाराष्ट्र के ठाणे से गिरफ्तार किया है। दुबे का सहयोगी अरविंद उर्फ गुड्डन रामविलास त्रिवेदी (46) कानपुर जिले में कुख्यात अपराधी के घर छापेमारी के दौरान आठ पुलिसकर्मियों की हत्या में संलिप्त था। 
एटीएस के पुलिस अधीक्षक विक्रम देशमाने ने कहा कि त्रिवेदी और उसके चालक सुशील कुमार उर्फ सोनू तिवारी (30) को ठाणे शहर के कोलशेट इलाके से गिरफ्तार किया गया। 
उन्होंने कहा कि बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने के बाद दुबे एवं अन्य के साथ त्रिवेदी भी फरार हो गया था। हमले में पुलिस उपाधीक्षक सहित आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे। देशमाने ने कहा कि एटीएस की जुहू इकाई को पता चला कि त्रिवेदी छिपने के लिए मुंबई आया हुआ है। उन्होंने कहा कि पूर्व ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ निरीक्षक दयानायक की अगुवाई में टीम ने कोलशेट से दोनों को गिरफ्तार कर लिया। 
एसपी ने कहा कि प्रारंभिक पूछताछ में त्रिवेदी ने स्वीकार किया कि वह और दुबे 2001 में उत्तरप्रदेश में नेता संतोष शुक्ला की हत्या और कई अन्य अपराधों में शामिल थे। उन्होंने कहा कि एटीएस ने उत्तरप्रदेश पुलिस के विशेष कार्यबल (एटीएस) को गिरफ्तारी के बारे में सूचना दे दी है। कानपुर कांड में शामिल कुख्यात दुबे शुक्रवार को एक कथित मुठभेड़ में मारा गया था। 
वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मारे गए अपराधी विकास दुबे, उसके परिवार के सदस्यों और साथियों द्वारा कथित रूप से धोखाधड़ी कर संपत्ति अर्जित और अवैध लेन-देन मामले की जांच करने और धनशोधन का मामला दर्ज करने के लिये तैयार है । 
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि लखनऊ में स्थित एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय ने छह जुलाई को इस संबंध में कानपुर पुलिस को पत्र लिखकर दुबे और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ दायर सभी प्राथमिकियां और आरोप पत्र तथा इन सभी मामलों की ताजा जानकारी मांगी है।
उन्होंने कहा कि ईडी जल्द ही दुबे, उसके सहयोगियों और परिवार के सदस्यों द्वारा कथित रूप से किये गए अपराध की जांच के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शिकायत दर्ज करके यह पता लगाएगा कि क्या बाद में इस धन का उपयोग अवैध रूप से चल और अचल संपत्ति अर्जित करने लिये तो नहीं किया गया।
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