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Malmas 2026: शादी-मुंडन पर लगेगा लगाम! 'अधिक मास' में भूलकर न करें ये 6 गलतियां; जानें क्या करें क्या नहीं

12:26 PM May 06, 2026 IST | Khushi Srivastava
malmas 2026  शादी मुंडन पर लगेगा लगाम   अधिक मास  में भूलकर न करें ये 6 गलतियां  जानें क्या करें क्या नहीं
Malmas 2026 Me Kya Kare Kya Nahi (AI Generated)
Malmas 2026 Me Kya Kare Kya Nahi: ज्योतिष शास्त्र और हिंदू धर्म में मलमास का बहुत महत्व बताया गया है। यह सिर्फ कैलेंडर का एक एक्स्ट्रा महीना नहीं होता है, बल्कि भगवान की भक्ति और खुद को सुधारने का एक शानदार मौका भी होता है। मान्यताएं हैं कि, इस महीने में किया गया दान, व्रत और पाठ अत्यंत पुण्यकारी होता है। इस साल मलमास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा। इस एक महीने के दौरान दान-पुण्य और पूजा पाठ करना लाभकारी माना जाता है, वहीं कुछ मांगलिक कार्यों में मनाही होती है।

Malmas 2026: मलमास कैसे पड़ता है?

मलमास हमारे प्राचीन खगोल विज्ञान की वह वैज्ञानिक गणना है, जो सौर और चंद्र कैलेंडरों के बीच तालमेल बिठाती है। चूंकि सौर वर्ष (365 दिन) और चंद्र वर्ष (354 दिन) के बीच हर साल 11 दिनों का अंतर होता है, इसलिए यह फासला तीन वर्षों में बढ़कर लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है। इसी समय को संतुलित करने और ऋतुओं के साथ पंचांग का सटीक संबंध बनाए रखने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे 'अधिक मास' या 'मलमास' कहा जाता है।

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क्यों खास है 2026 का मलमास?

2026 इसलिए खास है क्योंकि इस साल पंचांग में 12 की जगह 13 महीने होंगे। ऐसा संयोग हर साल नहीं बनता। ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से इस दौरान ग्रहों की चाल ऐसी होगी जो पूजा-पाठ और ध्यान लगाने के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है। इसे 'पुरुषोत्तम मास' भी कहते हैं, क्योंकि यह पूरा महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है।

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Malmas 2026 Me Kya Kare Kya Nahi: मलमास के नियम

Malmas 2026
Malmas 2026 (Source: Social Media)

मलमास में क्या करें?

  • सात्विक जीवन: खाने-पीने में सादगी रखें और मन में किसी के लिए भी बुरे विचार न लाएं।
  • गौ सेवा: गौशाला में गायों को हरा चारा खिलाएं और मंदिर में पूजा की सामग्री या मिठाई भेंट करें।
  • पवित्र स्नान: गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करें। अगर बाहर जाना मुमकिन न हो, तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर नहाएं।
  • हनुमान चालीसा: मलमास के दौरान हनुमान जी की पूजा करें और हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। इससे साहस और शक्ति मिलती है।
  • शिव पूजा: इस दौरान भगवान शिव की पूजा का खास महत्व है। शिवलिंग पर चंदन, बेलपत्र, धतूरा और पंचामृत चढ़ाएं और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।
  • दान-पुण्य का महत्व: इस महीने में किए गए दान का फल 10 गुना ज्यादा मिलता है। गरीबों को खाना, पैसे, कपड़े, तिल और गुड़ जैसी चीजों का दान जरूर करें।
  • भगवान विष्णु की भक्ति: मलमास के स्वामी भगवान विष्णु हैं। इस महीने में श्रीमद्भागवत गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना बहुत अच्छा होता है। 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करते रहें।

मलमास में क्या न करें?

  • नशीली चीजों से परहेज: इस महीने में तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांस, मछली और शराब का सेवन बिल्कुल न करें।
  • मांगलिक कार्य न करें: इस महीने में शादी-ब्याह, सगाई, मुंडन, जनेऊ या नामकरण जैसे कोई भी शुभ संस्कार नहीं करने चाहिए।
  • कारोबार और निवेश न करें: नया व्यापार शुरू न करें और कहीं भी पैसा निवेश करने से बचें, क्योंकि इससे आर्थिक नुकसान हो सकता है।
  • मकान और गृह प्रवेश न करें: नया घर खरीदना, घर की नींव डालना या गृह प्रवेश करना इस महीने में वर्जित है। ये काम मलमास के बाद ही करें।
  • नया काम की शुरूआत न करें: कोई भी नया काम, नया व्रत या व्रत का उद्यापन (समापन) इस दौरान नहीं करना चाहिए, वरना उसका पूरा फल नहीं मिलता।
  • तुलसी का अपमान न करें: भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है, इसलिए मलमास में तुलसी के पौधे का विशेष ध्यान रखें और उससे जुड़ी कोई गलती न करें।

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इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

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Khushi Srivastava

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खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।

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