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उप्र : 'बेटी बेचने' की अफवाह के कारण मॉब लिचिंग का शिकार बना पिता, वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में एक दिल दहला देने वाला सामने आया है जिसमे बेटी को बेच देने की अफवाह भीड़ द्वारा पिता की पिटाई की गयी और जब तक शख्स को अस्पताल पहुंचाया गया तब तक शख्स की मौत हो गयी।
उप्र : 'बेटी बेचने' की अफवाह के कारण मॉब लिचिंग का शिकार बना पिता, वीडियो वायरल
मैनपुरी : उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में एक दिल दहला देने वाला सामने आया है जिसमे बेटी को बेच देने की अफवाह  भीड़ द्वारा पिता की पिटाई की गयी और जब तक शख्स को अस्पताल पहुंचाया गया तब तक शख्स की मौत हो गयी। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। मृतक का नाम सर्वेश दिवाकर बताया गया है। 
घटना के जानकारों का कहना है , जब सर्वेश ने अपनी बेटी को नोएडा में एक रिश्तेदार के पास रहने के लिए भेजा था, तो उन्हें भी शायद इस बात का अंदाजा नहीं होगा यह फैसला उनकी मौत का कारण बन जाएगा। उनके पड़ोसियों को लगा कि उन्होंने अपनी बेटी को 'बेच दिया' और रविवार शाम को उनके साथ मारपीट की। वह घंटों तक सड़क पर पड़े रहे, लेकिन कोई उन्हें अस्पताल नहीं ले गया। 
अखिरकार जब पुलिस मौके पर पहुंची जब जाकर दिवाकर को अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, गंभीर रूप से चोटिल दिवाकर ने सोमवार को दम तोड़ दिया। एसपी अजय कुमार ने कहा, "हमने आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और एससी/एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है और एक वीडियो से चार लोगों की पहचान की गई है जिसे एक स्थानीय निवासी ने बनाया है। एक व्यक्ति का अभी तक पता नहीं चला है।" शव को ऑटोप्सी के लिए भेज दिया गया है। 
दिवाकर (45) फिरोजाबाद के सिरसागंज के एक हलवाई थे जो अपनी 16 वर्षीय बेटी के साथ किराये के मकान में मैनपुरी में रह रहे थे। उनकी बेटी पढ़ाई जारी रखते हुए इलाके के कुछ घरों में नौकरानी के रूप में काम करती थी। दिवाकर हाल के दिनों में आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी को नोएडा में एक रिश्तेदार के घर भेज दिया ताकि उसकी देखभाल की जा सके। 
पड़ोस में किसी ने अफवाह उड़ा दिया कि उन्होंने लड़की को 'बेच दिया' है और स्थानीय निवासी उन पर टूट पड़े। एसपी ने कहा, "हमें रविवार शाम को जानकारी मिली कि उनकी पिटाई की गई है। एक टीम वहां पहुंची और उन्हें सड़क पर पाया। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन सोमवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।"
समाजवादी पार्टी ने ट्वीट किया है कि वह दलित परिवार को 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी और राज्य सरकार से मुआवजे के रूप में 10 लाख रुपये की मांग करेगी।
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