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मणिपुर का ‘इमा कैथेल’यानि ‘मदर्स मार्किट’

भारत को अनोखा देश क्यों कहा जाता ये साबित करने की जरूरत नहीं है। आज एक और ऐसी ही अनोखी बात हम आपको बताते है। भारत के उत्तर में स्थित है मणिपुर राज्य, जो अपनी प्राचीन और प्रभावशाली जीवन शैली के लिए मशहूर है। मणिपुर में एक खास तरह का बाज़ार लगता है जिसका नाम […]
मणिपुर का ‘इमा कैथेल’यानि ‘मदर्स मार्किट’

भारत को अनोखा देश क्यों कहा जाता ये साबित करने की जरूरत नहीं है। आज एक और ऐसी ही अनोखी बात हम आपको बताते है। भारत के उत्तर में स्थित है मणिपुर राज्य, जो अपनी प्राचीन और प्रभावशाली जीवन शैली के लिए मशहूर है। मणिपुर में एक खास तरह का बाज़ार लगता है जिसका नाम है ‘इमा कैथेल’, जिसका हिंदी में अर्थ होता है महिलाओं का बाजार।

आप सोच रहे होंगे की इसमें क्या खास बात है तो वो ये की इस बाज़ार में आपको सभी दूकानदार महिला ही मिलेंगी। इतिहास के अनुसार ये भारत के सबसे पुराने स्थापित बाजारों में से एक है जिसकी स्थापना 16वी शताब्दी में हुई थी। वर्ष 1533 में इस बाज़ार की नीव रखी गयी थी और तबसे इस बाज़ार पर महिलाओं का वर्चस्व कायम है।

इतने लम्बे समय से यहाँ पर महिलाएं ही बाज़ार का संचालन कर रही है जो खुद में एक अनोखी बात है। आपको बता दें ये कोई छोटा मोटा बाज़ार नहीं है बल्कि यहाँ पर करीब 4000 दुकाने है और पूरे एशिया में ये महिलाओं का सबसे बड़ा मार्किट है। इस बाज़ार को दुनियाभर में मदर्स मार्किट के नाम से जाना जाता है।

इस बाज़ार में आपको सिर्फ महिलाओं से जुडी चीज़ें मिलेंगी ऐसा भी नहीं है आपको दैनिक आवश्यकताओं से जुडी हर चीज़ इस मार्किट में मिल जाएगी। दूर दूर के जिलों से महिलाएं यहाँ पर सामान बेचने आती है।

कुछ खुद यहाँ पर पटरी लगा कर सामान बेचती है और कुछ यहाँ पर स्थापित दूकानदार महिलाओं को अपना सामान बेचकर घर लौट जाती है।

इस बाज़ार के भी एक दिलचस्प कहानी है , कहा जाता है 16वीं शताब्दी में जब यहाँ पर राजा का शासन था तब अधिकांश पुरुष सेना में भर्ती होते थे और ऐसे स्थिति में महिलाओं को ही बाकी काम करने पड़ते थे। तबसे ये परंपरा बन गयी और आज स्थितियां बदल गयी है पर ये बाज़ार नहीं बदला।

यहाँ पर दूकान लगाने वाली महिलायें यहाँ की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है और साथ ही इस बाज़ार को देखने देश विदेशों से भी पर्यटक खूब आते है।

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