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तिरंगे में लिपटे शहीद नायक राजविंद्र सिंह को सैन्य सम्मान और अश्रुपूर्ण धाराओं के साथ अंतिम विदाई

तिरंगे में लिपटे शहीद नायक राजविंद्र सिंह को सैन्य सम्मान और अश्रुपूर्ण धाराओं के साथ अंतिम विदाई
लुधियाना-समाना : जम्मू-कश्मीर के पुलवामा क्षेत्र में 2 दिन पहले शहीद हुए पंजाब के सपूत, समाना के गांव दोदड़ा में रहने वाले भारतीय सेना के 29 वर्षीय जवान नायक राजविंद्र सिंह का सरकारी और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान शहीद के मां-बाप ने कांपते हाथों और भराई आवाज के साथ जिगर के टुकड़े को याद करते हुए सैल्यूट दिया तो वारिसों और नजदीकी रिश्तेदारों समेत तमाम यार-दोस्तों ने भारत मां की जयघोष के साथ शहीद को अंतिम विदाई दी। 
इस अवसर पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र ङ्क्षसह की तरफ से विधायक शुतराना निर्मल सिंह ने शहीद की मृतक देह पर फूल अर्पण करते हुए श्रद्धांजलि भेंट की। शहीद के पिता अवतार सिंह और माता महिंद्र कौर समेत बड़े भाई बलविंद्र सिंह ने राजविंद्र सिंह को याद करके सलामी दी। इससे पहले कश्मीर से भारतीय सेना के विशेष जहाज द्वारा नायक राजविंद्र सिंह की देह को चंडीगढ़ और फिर पटियाला सैन्य स्टेशन पर लाया गया, जहां से सेना के जवानों और आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों ने बड़े काफिले के रूप में गांव की देहरी तक जयघोष के बीच लाया। पटियाला सैन्य स्टेशन के कमंाडर बिग्रेडियर प्रताप सिंह रनावत ने शहीद के ताबूत पर लिपटा तिरंगा शहीद के मां-बाप को सैल्यूट के साथ सौंपा। 
बुजुर्ग माता-पिता ने मातृभूमि के लिए बलिदान हुए सपूत को सैल्यूट कर अंतिम विदाई दी तो लोगों की आंखों छलक उठीं। गांववासियों के मुताबिक देश की सीमाओं को ही अपना घर समझने वाले बहादुर नायक राजविंदरसिंह की इच्छा थी कि वह अपने गांव में अपने मकान को बड़ा बना सकें। इसके लिए जनवरी में घर आने के बाद ईंटें भी खरीदकर रख गए थे, लेकिन वे ईंटे बड़े घर में नहीं बदल सकीं। भाई बलवंत सिंह ने बताया कि राजविंदर को 17 जुलाई को गांव आना था। उन्होंने कहा था कि गांव लौटने पर ही घर तैयार करवाएंगे। उसके लिए वह पहले से ईंटें व अन्य मैटीरियल लेकर घर में रखवा गए थे।
राजविंदर के जिगरी दोस्त ओमप्रकाश के मुताबिक शहीद के चेहरे पर लगी थी गोली।  स्मरण रहे कि 2 दिन पहले जम्मू कश्मीर के पुलवामा के गांव गोसू में आतंकवादियों के खिलाफ सेना के चल रहे सर्च ऑपरेशन में हिस्सा लेते हुए आतंकवादियों की गोली का शिकार हुए।

- सुनीलराय कामरेड
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