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किसानों और सरकार के बीच आज की बैठक में भी नहीं निकला समाधान, अब 9 दिसंबर को होगी वार्ता

केंद्र के नये कृषि कानूनों के विरुद्ध चल रहे प्रदर्शनों को लेकर बने गतिरोध को तोड़ने का प्रयास करते हुए सरकार ने किसान नेताओं के साथ पांचवे दौर की वार्ता की।
किसानों और सरकार के बीच आज की बैठक में भी नहीं निकला समाधान, अब 9 दिसंबर को होगी वार्ता
केंद्र के नये कृषि कानूनों के विरुद्ध चल रहे प्रदर्शनों को लेकर बने गतिरोध को तोड़ने का प्रयास करते हुए सरकार ने किसान नेताओं के साथ पांचवे दौर की वार्ता की। ये बैठक भी पिछली चार दौर की बैठकों की तरह बेनतीजा रही। केंद्र सरकार के अनुरोध पर अब किसान संगठनों को 9 दिसंबर को छठे दौर की वार्ता के लिए बुलाया है। बता दें, नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का आज 10वां दिन है।
किसान कानूनों पर सरकार के साथ हुई बैठक के बाद किसान नेता ने कहा सरकार ने तीन दिन का समय मांगा है। 9 दिसंबर को सरकार हमें प्रपोज़ल भेजेगी, उस पर विचार करने के बाद बैठक होगी। 8 तारीख को भारत बंद ज़रूर होगा। ये कानून ज़रूर रद्द होंगे। किसान समूहों ने बैठक में मौन व्रत धारण किया, सरकार से कहा कि नए कृषि कानूनों को रद्द करने की उनकी मांग पर ‘हां’ या ‘न’ में दे जवाब।
जानकारी के मुताबिक़ सरकार ने शनिवार को आंदोलनकारी किसानों के प्रतिनिधियों से कहा कि उनकी चिंताओं पर ध्यान दिया जा रहा है लेकिन किसान संगठनों के नेता कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे और उन्होंने बातचीत बीच में छोड़ने की चेतावनी दी। 
हालांकि, सरकार किसान नेताओं को वार्ता जारी रखने के लिए मनाने में सफल रही। यह सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच पांचवें दौर की वार्ता है। किसानों का दावा है कि इन कानूनों से मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। 
अपराह्न ढाई बजे शुरू हुई बैठक जब चाय ब्रेक के बाद दोबारा शुरू हुई तो किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार सितंबर में लागू तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के बारे में नहीं सोच रही तो वे बैठक छोड़कर चले जाएंगे। ब्रेक में किसान नेताओं ने अपने साथ लाया भोजन और जलपान किया। 
सूत्रों ने कहा कि सरकार ने उन्हें बातचीत जारी रखने के लिए मना लिया। मंत्रियों द्वारा रखे गये प्रस्तावों पर बैठक में भाग लेने वाले किसानों के बीच मतभेद भी सामने आया। एक सूत्र ने कहा कि सरकार ने किसानों के खिलाफ पराली जलाने के और कुछ किसान कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की भी पेशकश की। 
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