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550वें प्रकाश पर्व को समर्पित श्री अकाल तख्त साहिब पर शुरू हुए मूलमंत्र के सिमरन

श्री गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के संबंध में एक नवंबर से 13 नवंबर तक आध्यात्मिक स्तर पर संगत को एक समय मूलमंत्र के सिमरन श्री अकाल तख्त साहिब पर करवाए गए।
550वें प्रकाश पर्व को समर्पित श्री अकाल तख्त साहिब पर शुरू हुए मूलमंत्र के सिमरन
लुधियाना-अमृतसर : श्री गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के संबंध में एक नवंबर से 13 नवंबर तक आध्यात्मिक स्तर पर संगत को एक समय मूलमंत्र के सिमरन श्री अकाल तख्त साहिब पर करवाए गए। यह सिमरन शाम 5 बजे से 5.10 बजे तक हुए।  इस अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी हरप्रीत सिंह, तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी रघुबीर सिंह, सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह  के अतिरिक्त अन्य धार्मिक और पंथक शख्सियतें उपस्थित थी। 
प्राप्त जानकारी के मुताबिक श्री अकाल तख्त साहिब से मूलमंत्र की शुरूआत होते ही देश-विदेश के कोने-कोने में स्थित गुरूद्वारों में सिख संगत मूलमंत्र का जाप किया करेंगी। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब की डियोढ़ी में आकर संगत को संबोधित करते हुए कहा कि श्री गुरूनानक देव जी के प्रकाश पर्व को मना रही पूरी दुनिया में रहते गुरूनानक नाम लेवा सिख संगत गुरूनानक देव जी की पवित्र स्मृति में जुडऩे की हसरत रखती है और समूचे संसार की संगत मूलमंत्र के सिमरन द्वारा प्रकाश समागमों का हिस्सास बन सकेंगी।  

उन्होंने कहा कि मूल मंत्र गुरूनानक देव जी के फलसफे का आधार है, इसलिए समूह संगत भारतीय वक्त के मुताबिक शाम 5 बजे 13 नवंतर तक प्रतिदिन 10 मिनट का निरंतर  मूलमंत्र का जाप करें, चाहे कोई सफर कर रहा हो या दुनियावी कामों में व्यस्त हो, उसको दिन में निश्चित समय के मुताबिक इस मूलमंत्र का जाप करना चाहिए। 

इस अवसर पर सिख साहिब ने बताया कि भारत के अलावा कनाडा, अमेरिका, इंगलैंड, कीनिया, आस्ट्रेलिया, सिंगापुर, ब्राजील, मलेशिया, दुबई के अलावा पाकिस्तान की सरजमीं के गुरूद्वारों में बड़े स्तर पर जाप होगा।  श्री गुरू नानक देव जी के स्थान ननकाना साहिब पाकिस्तान में गुरूपर्व वाले दिन 12 नवंबर को मूलमंत्रों का समस्त संगत जाप करेंगी। इस मोके पर शिरोमणि कमेटी कर्मचारियों और अधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में संगत भी उपस्थित थी।

 - सुनीलराय कामरेड
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