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मिजोरम में बेकाबू 'अफ्रीकन स्वाइन फीवर', एक महीने में 1700 से अधिक सुअरों की मौत

मिजोरम में एक महीने में 1,700 से अधिक सुअरों की जान लेने वाले ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर’ (एएसएफ) को अब भी नियंत्रित नहीं किया जा सका है।
मिजोरम में बेकाबू 'अफ्रीकन स्वाइन फीवर', एक महीने में 1700 से अधिक सुअरों की मौत
देश में जहां कोरोना महामारी इंसानों को निगल रही है, वहीं दूसरी ओर मिजोरम  ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर’ (एएसएफ) से जूझ रहा है। सुअरों में होने वाली इस बीमारी ने एक महीने में 1,700 से अधिक सुअरों की जान ले ली है। राज्य में अभी तक इस बीमार की रोकथाम नहीं हो पाई है।
पशु पालन एवं पशु चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक (पशु स्वास्थ्य) डॉ. लालमिंगथंगा ने एक न्यूज़ एजेंसी को बताया कि यह बीमारी अन्य इलाकों में फैल रही है जबकि इस बीमारी के केंद्र में रोज होने वाली मौतों में कुछ हफ्तों में गिरावट देखने को मिली है। 
इससे पहले राज्य सरकार ने लुंगलेई जिले में लुंगसेन गांव और इलेक्ट्रिक वेंग, आइजोल में आर्म्ड वेंग और एडेनथर इलाकों, सेरचिप जिले में केतुम गांव और दक्षिण मिजोरम के सिआह शहर में वेपी-1 को इस बीमारी का केंद्र घोषित किया था। लालमिंगथंगा ने बताया कि कुछ और इलाकों को इस बीमारी का केंद्र घोषित किया जाएगा। 
उन्होंने बताया कि एएसएफ से 21 मार्च को बांग्लादेश सीमा के समीप लुंगसेन गांव में पहली मौत होने के बाद से अब तक कम से कम 1,728 सुअरों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से 6.91 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ है। अधिकारी ने बताया कि सुअरों के नमूने जांच के लिए एकत्रित किए गए हैं। मौत की वजह का अभी पता नहीं चला है। अधिकारियों ने बताया कि एएसएफ संक्रमण पड़ोसी देश बांग्लादेश और म्यांमा से आए सुअरों से होने का संदेह है।
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