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अधिकांश भारतीयों का मानना है कि केजरीवाल सरकार दिल्ली में बसों के बेड़े को बढ़ाने के अपने वादे को पूरा करने में विफल रहेगी: सर्वे

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 29 जून को घोषणा की थी कि उनकी सरकार राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के प्रयास में 1,950 नई बसें खरीदेगी। केजरीवाल ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने 4,880 और बसों की खरीद के लिए नए सिरे से टेंडर जारी किए हैं।
अधिकांश भारतीयों का मानना है कि केजरीवाल सरकार दिल्ली में बसों के बेड़े को बढ़ाने के अपने वादे को पूरा करने में विफल रहेगी: सर्वे
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 29 जून को घोषणा की थी कि उनकी सरकार राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के प्रयास में 1,950 नई बसें खरीदेगी। केजरीवाल ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने 4,880 और बसों की खरीद के लिए नए सिरे से टेंडर जारी किए हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि नई बसों को जोड़ने और पुरानी बसों को बदलने के बाद, दिल्ली के पास 2024 तक 12,000 बसों का बेड़ा होगा। केजरीवाल सरकार ने 2015 में इसी तरह की घोषणा की थी। आप सरकार ने 2015 में वादा किया था कि 10,000 बसें राष्ट्रीय राजधानी में 2020 तक जोड़ी जाएगा। हालांकि, इस मोर्चे पर कुछ नहीं हुआ। वर्तमान में, दिल्ली के पास लगभग 7,200 बसों का बेड़ा है। इस बेड़े में से, दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) 3,900 बसें चलाती है और 3,300 बसें निजी तौर पर संचालित क्लस्टर बस सेवा द्वारा संचालित की जाती हैं।
सीवोटर-इंडिया ट्रैकर ने इस बार अपने वादे को पूरा करने के लिए केजरीवाल सरकार की क्षमता के बारे में लोगों के विचार जानने के लिए आईएएनएस की ओर से एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण कराया।
सर्वेक्षण के दौरान, अधिकांश उत्तरदाताओं (सर्वे में शामिल लोग) ने कहा कि दिल्ली सरकार इस बार भी अपना वादा निभाने में विफल रहेगी। सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, 62 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि केजरीवाल अपनी हालिया घोषणा के अनुसार दिल्ली की सड़कों पर नई बसें नहीं जोड़ पाएंगे, जिसे लेकर उन्होंने कहा है कि वे 2024 तक राष्ट्रीय राजधानी में बेड़े को बढ़ाकर 12,000 कर देंगे।
सर्वेक्षण के दौरान, एनडीए के अधिकांश मतदाताओं (73 प्रतिशत) ने कहा कि यह सिर्फ एक और बड़ी घोषणा है और केजरीवाल सरकार अपना वादा पूरा नहीं करेगी, वहीं इस मुद्दे पर विपक्षी मतदाताओं की राय विभाजित रही। सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक, जहां 47 फीसदी विपक्षी मतदाताओं ने कहा कि आप सरकार इस बार राष्ट्रीय राजधानी में बसों की संख्या बढ़ाने के अपने वादे को पूरा करेगी, वहीं 53 फीसदी विपक्षी मतदाताओं को ऐसा नहीं लगता है।
दिलचस्प बात यह है कि सर्वेक्षण के दौरान अधिकांश शहरी और ग्रामीण मतदाताओं ने कहा कि आप सरकार अपने वादे को पूरा करने में विफल रहेगी। सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, 60 प्रतिशत शहरी मतदाताओं और 63 प्रतिशत ग्रामीण मतदाताओं ने कहा कि केजरीवाल सरकार 2024 तक राष्ट्रीय राजधानी में बसों के मौजूदा बेड़े में 400 नई बसें नहीं जोड़ पाएगी।
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