नरेन्द्र मोदी : एक संन्यासी महानायक

12:08 AM Sep 18, 2020 | Aditya Chopra
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 70वां जन्म दिन देशभर में सादगी से मनाया गया। भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में सेवा सप्ताह का आयोजन कर रही है। प्रधानमंत्री अपने जन्म दिन पर एक काम करना कभी नहीं भूलते। वह जब से प्रधानमंत्री बने और गुजरात से दिल्ली आए तब से वह हर जन्म दिन पर मां हीराबेन का आशीर्वाद लेने गुजरात जरूर जाते हैं। इस बार कोरोना वायरस महामारी और संसद के मानसून सत्र के कारण गुजरात नहीं जा पाए।

नरेन्द्र मोदी भारत के ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म आजादी  के बाद हुआ है। वह आज सवा अरब से अधिक भारतीयों की आकांक्षाओं और आशाओं के प्रतीक बन गए हैं। उनकी सरकार ने कई निर्णय लिए जिन्होंने देश की छवि बदल कर रख दी।

स्वच्छ भारत से स्वस्थ भारत तक और कश्मीर क्रांति से नागरिकता क्रांति तक मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसले लिए। बात 1967 से शुरू करता हूं जब केरल के कालीकट शहर में जनसंघ (आज की भाजपा) का अधिवेशन हुआ और उसमें स्वर्गीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय के हाथ में इस पार्टी की कमान प्रो. बलराज मधोक ने सौंपी।

दक्षिण भारत में जब जनसंघ का अधिवेशन आयोिजत करना एक अनोखी घटना बनी थी क्यो​ं​कि जनसंघ तब तक उत्तर भारत की ही पार्टी मानी जाती थी मगर समुद्र के किनारे बसे इस शहर का चयन जनसंघ ने अपनी सीमाओं को एक घेरे में बंधे रहने के विचार का प्रतिकार किया था।

इसके ठीक 46 वर्ष बाद 2013 में पुनः वहीं पार्टी ने समुद्र के ​किनारे बसे शहर गोवा में ऐसा प्रयोग किया गया ​जिसकी प्रतिध्वनि पूरे देश ने बड़े शांत मन से सुनी थी मगर पार्टी के भीतर भारी मंथन चल रहा था। गोवा में भाजपा ने 2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी की घोषणा की थी। यह प्रत्याशी थे नरेन्द्र दामोदर दास मोदी।

भाजपा के नीतिकारों के ​लिए यह फैसला ऐतिहासिक था क्योंकि तब केन्द्र में स्थापित कांग्रेस सरकार का पूरा इकबाल खत्म हो चुका था। मनमोहन सरकार नीतिगत अपंगता का शिकार हो गई थी। घोटाला का चारों तरफ शोर था। पूरा भारत नेतृत्व संकट के दौर से गुजर रहा था। पूरे राजनीतिक पटल पर नेतृत्व का ऐसा संकट कभी पैदा ही नहीं हुआ था।

ऐसे वातावरण में नरेन्द्र मोदी के विपक्षी प्रत्याशी के रूप में उदय को सभी राजनीतिक दल अंधेरे में घुमाई गई लाठी के तौर पर ले रहे थे लेकिन जिस व्यक्ति को स्वयं पर अटूट ​विश्वास था वह केवल नरेन्द्र मोदी ही थे जो भारतवासियों काे संदेश दे रहे थे कि वह भ्रष्टाचार और कुशासन से जर्जर होते भारत की दशा और दिशा बदलेंगे मगर चुनौती छोटी नहीं थी। 

सभी राजनीतिक दल उनको निशाना बना रहे थे जबकि नरेन्द्र माेदी गांधीवाद के राजनीतिक दर्शन के अनुरूप भारत की राजनीति के सूत्र गिना रहे थे। यह कोई राजनीतिक प्रयोग नहीं था​ बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से एक विचार को धर्मनिरपेक्ष रूप में प्रस्तुत करने वाली कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की तस्दीक हो रही थी। 

नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन को देखते हुए और कंधे पर एक झोले में अपनी सम्पत्ति को समेट कर चलने वाले व्यक्तित्व के बारे में देश के लोगों को अपनी राय बनाने में ज्यादा समय नहीं लगा। लोगों ने पाया कि धन और सत्ता व ताकत की अंधी दौड़ की राजनीति के बीच एक संन्यासी आ गया है। इसे कहीं मत जाने दो और बना दो प्रधानमंत्री। नरेन्द्र मोदी का जादू ‘सबका साथ सबका विकास’ नारे के साथ ऐसा चला कि भाजपा सत्ता में आ गई।

नरेन्द्र मोदी ने देश को भ्रष्टाचार मुक्त शासन दिया। उनका पूरा व्यक्तित्व और कृतित्व तीन चीजों पर टिका हुआ है। वह है व्यवस्था, प्रबंधन और उनका आभा मंडल। उन्होंने इन्हीं चीजों के बल पर गुजरात से दिल्ली तक का सफर तय किया है। जिस तेजी से उन्होंने विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ी उसे उनकी कूटनीतिक सफलता ही माना जाता है।

सामान्य देखा जाता है कि राजनीति में नेताओं के अपने निजी लोग होते हैं जो अलग-अलग कामों को करते हैं लेकिन इसे प्रधानमंत्री का करिश्मा कहिये या कुछ और कि उनकी टीम में कोई नम्बर दो नजर नहीं आता। मोदी सरकार-वन में उन्होंने जन कल्याणकारी योजनाओं का अम्बार लगा दिया।

स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत इत्यादि। जिनका लाभ समाज के कमजोर वर्गों को मिला। जहां तक देश की सुरक्षा का सवाल है पुलवामा हमले के बाद जिस तरीके से पाकिस्तान में हमारी सेनाओं ने घुसकर स​र्जिकल स्ट्राइक की और फिर बालाकोट के आतंकी ​शिविर पर हवाई हमला किया, उससे देशवासियों को महसूस हुआ कि देश का नेतृत्व सही हाथों में है।

देश की जनता ने उन्हें दूसरी बार देश की सत्ता सौंप दी। राम मंदिर ​निर्माण, समान आचार संहिता और जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हमेशा भाजपा के एजैंडे में रहे लेकिन पूर्ण बहुमत न मिलने से उसका एजैंडा अधूरा ही रहा। यह देश का सौभाग्य ही रहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को एक ही झटके में हटा दिया गया और जम्मू-कश्मीर आैर लद्दाख को केन्द्र शासित प्रदेश बना दिया गया।

उनके सहयोगी गृह मंत्री अमित शाह ने यह काम बहुत ही साहसिक ढंग से ​किया। अब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद एक या दो जिलों में ही सिमट गया है। सुरक्षा बलों को फ्री हैंड ​दिया गया है। आतंकवाद के खिलाफ उनकी सरकार ने जीरो टालरेंस की नीति अपनाई। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से मुक्ति दिलवाई गई।

तीन तलाक मुक्त भारत समान आचार संहिता की ओर एक बड़ा कदम रहा। जहां तक राम मंदिर ​निर्माण की बात है, सुप्रीम कोर्ट के फैसले केे बाद अब मंदिर निर्माण का काम भी शुरू होने जा रहा है। मोदी शासन में देश की रक्षा पंक्ति लगातार मजबूत होती रही। हमारी सेनाओं के पास अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्र मौजूद हैं।

चीन की साजिशों का मुंह तोड़ ​जवाब भारतीय सेना लगातार दे रही है। प्रधानमंत्री एक पूर्णकालिक एवं उत्कृष्ट राजनेता हैं। उनके ​दिन का प्रत्येक सचेत पल केवल देश के विकास और शक्ति प्रदर्शन के तरीके सोचने में लगता है। श्रेष्ठ राजनीतिज्ञ वही होता है जो संकटकाल में भी देशवासियों में ऊर्जा का संचार करता रहे, ऐसा उन्होंने कोरोना महामारी के दिनों में कर दिखाया है।

नरेन्द्र मोदी एक महानायक के तौर पर स्थापित हो चुके हैं लेकिन जब भी मैं उन्हें लम्बी सफेद दाढ़ी में बोलते देखता हूं तो लगता है कि राजनीतिज्ञ होने के बावजूद एक संन्यासी ही हैं। प्रकृति और परमात्मा का सान्निध्य उन्हें पसंद है। वर्तमान दौर में उनका कोई सानी नहीं। पंजाब केसरी परिवार की तरफ से उनके जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई।