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समीर वानखेड़े ने फर्जी दस्तावेज से हासिल की सरकारी नौकरी, होनी चाहिए जांच : नवाब मलिक

नवाब मलिक ने वानखेड़े पर फर्जी तरीके से सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वानखेड़े ने जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर एक योग्य दलित की नौकरी छीन ली। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवाब मलिक ने कहा कि समीर वानखेड़े का मैंने जो ब
समीर वानखेड़े ने फर्जी दस्तावेज से हासिल की सरकारी नौकरी, होनी चाहिए जांच : नवाब मलिक
एनसीपी नेता नवाब मलिक मुंबई क्रूज ड्रग्स केस को लेकर एनसीबी मुंबई के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े पर हमलावर हैं। उन्होंने वानखेड़े पर फर्जी तरीके से सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वानखेड़े ने जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर एक योग्य दलित की नौकरी छीन ली। 
मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवाब मलिक ने कहा कि समीर वानखेड़े का मैंने जो बर्थ सर्टिफिकेट ट्वीट किया वह ओरिजिनल है। समीर वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े ने खुद को इस्लाम में कन्वर्ट किया था। वानखेड़े को बाद में विचार आया था और उन्होंने नौकरी के लिए दलित सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया और एक डिजर्विंग (योग्य) दलित का हक छीन लिया। 
नवाब मालिक ने कहा कि मुझे एक अनाम एनसीबी अधिकारी का पत्र मिला है। वो खत मुझे एनसीबी के एक अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर भेजा है। मैं डीजी नारकोटिक्स को यह पत्र भेजकर अनुरोध कर रहा हूं कि इस पत्र को एनसीबी के समीर वानखेड़े पर की जा रही जांच में शामिल किया जाए। हम मांग करते हैं कि जांच होनी चाहिए।
अस्थाना द्वारा वानखेड़े को NCB में लगाया गया
पत्र का हवाला देते हुए एनसीपी नेता ने कहा कि समीर वानखेड़े को पूर्व सीबीआई अधिकारी राकेश अस्थाना द्वारा एनसीबी में लाया गया था। उन्होंने कहा कि पत्र में 26 मामलों का जिक्र है और इन 26 मामलों में समीर वानखेड़े ने मामले की जांच के दौरान उचित नियमों का पालन नहीं किया। 

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उन्होंने बताया कि उस चिट्ठी में अज्ञात अधिकारी ने बताया है कि दफ्तर में कुछ विशेष अधिकारियों का गिरोह बना हुआ है। फर्जी मामलों में लोगों को फंसाया जाता है। पैसे वसूल किए जाते हैं। जो ईमानदार अफसर हैं, उन्हें दरकिनार किया जाता है। उन्होंने कहा कि उस लेटर में जिन 26 मामलों की बात कही गई है, अगर उसकी जांच होती है तो और भी कई चीजों का खुलासा हो सकता है।
गौरतलब है कि नवाब मलिक ने दावा किया कि बर्थ सर्टिफिकेट के अनुसार, वानखेड़े एक जन्मजात मुस्लिम हैं, लेकिन कथित तौर पर एक आरक्षित श्रेणी के माध्यम से नागरिक सेवाओं (यूपीएससी) की परीक्षा में शामिल हुए और भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी बन गए। मलिक ने कहा, "उन्होंने (सिविल सेवा) परीक्षा और नौकरी में आरक्षण पाने के लिए दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया है।"


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