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बिहार का एनडीए गठबंधन अटूट है : रामविलास पासवान

उन्होंने कहा कि 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सीटीजनशीप में संशोधन किया गया जिस पर कांग्रेस ने हो-हल्ला किया, व हीं 7 मई, 2010 को तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने एनपीआर मेटेंस के बाद एनआरसी की बात कर गलतफहमी पैदा किये।
बिहार का एनडीए गठबंधन अटूट है : रामविलास पासवान
पटना : केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने पटना में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बिहार का एनडीए गठबंधन अटूट है। समय आने पर सीट शेयरिंग का मामला गठबंधन के सभी सहयोगी दल आपस में बैठकर तय कर लेंगे। तीन-चौथाई से विधानसभा का चुनाव एनडीए जीतेगा। होटल मौर्या में पत्रकारों से वार्तालाप कर केन्द्रीय मंत्री श्री पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि  एनआरसी की अभी कोई बात नहीं है फिर भी विपक्षी इसको लेकर हो-हल्ला कर रहे हैं। 1881 से लेकर अब तक प्रत्येक दस वर्ष जनगणना का कार्य हुआ। 1955 में सीटीजनशीप कानून बना। इस कानून के तहत कोई भी किसी देश का नागरिक बन सकता है। बशर्ते उस देश के कानून का पालन करना होगा। 

उन्होंने कहा कि 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सीटीजनशीप में संशोधन किया गया जिस पर कांग्रेस ने हो-हल्ला किया, व हीं 7 मई, 2010 को तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने एनपीआर मेटेंस के बाद एनआरसी की बात कर गलतफहमी पैदा किये। एनआरसी केवल असम में लागू है जो 1971 से चल रहा है। सीटीजनशीप एकट लोकसभा एवं राज्यसभा से पारित हुआ उस समय सबों का समर्थन मिला। अब एनपीआर को एनआरसी से जोड़ रहे हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बंगलादेश के अल्पसंख्यकों को नागरिकता दिया जा रहा है। 2010 में जो गलतफहमी पैदा किया गया उस समय कांग्रेस क्यों नहीं विरोध किया। 

केन्द्रीय मंत्री ने वन नेशन वन कार्ड का जिक्र कर कहा कि 1 जून, 2020 तक एक राष्ट्र एक कार्ड का लक्ष्य है इसे पूरा कर लिया जायेगा। अभी 16 राज्यों में लागू है-यूपी, बिहार, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ में भी जल्द यह काम पूरा होगा। राशन कार्डधारियों को दो रुपये किलो गेहॅू एवं तीन रुपये किलो चावल 610 लाख टन पीडीएस के मार्फत से दिया जा रहा है। पूरे देश में राशन कार्डधारियों की संख्य 81 करोड़ है। अनाज के लिए भारत सरकार एक  लाख 78 हजार करोड़ की सब्सिडी देती है। वर्तमान की राशन कार्डधारियों की जांच में तीन करोड़ राशन कार्ड जाली पकड़ा गया, जिसमें 44 हजार 404 लाभार्थी बिहार के हैं।  जाली कार्ड की जांच होने पर सरकार को तीन करोड़ का बचत हुआ है।

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