भारत-सऊदी अरब संबंधों में नई ऊर्जा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सऊदी अरब की यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों में प्रगाढ़ता आई है। वैश्विक मसलों पर दोनों देशों के स्वर एक जैसे हो रहे हैं। आतंकवाद के मुद्दे पर सऊदी अरब का भारत को समर्थन बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के बढ़ते महत्व और सकारात्मक कूटनीति का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की या​त्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पैट्रोलियम, रक्षा एवं नागर विमानन, रुपे कार्ड समेत अलग-अलग क्षेत्रों में समझौते हुए। खास बात यह है कि सऊदी अरब ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के कंधे से कंधा मिलाकर काम करने का ऐलान किया।

पुलवामा हमले के बाद दोषियों को सजा दिलाने की भारत की मुहिम को दुनिया भर से मिले समर्थन के बीच सऊदी अरब के युवराज भारत यात्रा पर आए थे और उन्होंने तभी आतंकवाद के खिलाफ भारत की मुहिम का समर्थन किया था। तब भी दोनों देशों के बीच पांच अहम समझौते हुए थे। पहले भारत और सऊदी अरब के संबंध बहुत सीमित थे क्योंकि सऊदी अरब को पाकिस्तान का मित्र देश माना जाता रहा है और उसे भारत के विरुद्ध पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद को धन मुहैया कराने वाले देश के रूप में समझा जाता है। कश्मीर के मसले पर भी उसकी नीति पाकिस्तान समर्थित रही लेकिन पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के संबंध मजबूत हुए हैं और साथ ही व्यापार और निवेश की गति ने एक-दूसरे को भरोसा जीतने का काम किया है। 

1982 में प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने भी सऊदी अरब की यात्रा की थी और 2006 में शाह अब्दुल्ला ने भारत की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान दिल्ली घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन ​सिंह ने सऊदी किंगडम की यात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय भागीदारी का स्वर ऊंचा हुआ था और सामरिक भागीदारी को नया आयाम मिला था।अब सवाल यह है कि पाकिस्तान का मित्र देश भारत के करीब क्यों आ रहा है। इसके पीछे भी कई कारण हैं। वैश्विक स्तर पर सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था भी संकट में है। भारत का 17 फीसदी तेल और 32 फीसदी एलपीजी सऊदी से आयात होता है। दोनों देशों के बीच लगभग 27.5 अरब डालर का व्यापार है। इसमें अकेले 22 अरब डालर के पैट्रोलियम पदार्थ भारत उससे खरीदता है जबकि भारत महज 5.5 अरब डालर का निर्यात करता है। 

सऊदी अरब भारत में सौ अरब डालर का निवेश करना चाहता है। तेल की कीमतों में ​गिरावट के चलते सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को नुक्सान हुआ है और यमन के साथ लड़ाई में शामिल होने की वजह से उसका खर्च काफी बढ़ गया है। सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था तेल पर निर्भर करती है, लेकिन अब वह अन्य क्षेत्रों में निवेश करना चाहता है। सऊदी अरब भारत, जापान और दक्षिण कोरिया में निवेश कर पैसा बनाना चाहता है। वह अपनी नीतियों में बदलाव ला रहा है, पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है और नई कम्पनियां लगा रहा है।भारत और सऊदी अरब में मजबूती आने का कारण वहां काम कर रहे लाखाें भारतीय भी हैं। सऊदी अरब में काम कर रहे भारतीयों से भारत को भी कई अरब डालर की विदेशी मुद्दा हासिल होती है। मध्य प्रदेश में एक बड़ा पैट्रोकैमिकल काम्पलैक्स बन रहा है जिसमें सऊदी अरब और यूएई का बहुत योगदान है।

भारत की अर्थव्यवस्था काफी विस्तार कर चुकी है। दोनों देशों की एक-दूसरे पर निर्भरता बढ़ती चली जा रही है। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने पर भी सऊदी अरब काे कोई आपत्ति नहीं है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कंगाल हो चुकी है। वह हमेशा मदद के लिए  मित्र देशों के सामने कटोरा लेकर खड़ा रहता है। इमरान सरकार के अस्थिर होने का खतरा बना हुआ है। सऊदी अरब चाहता था कि ईरान के साथ तनाव में पाकिस्तान खुलकर उसका साथ देगा और यमन के युद्ध में अपनी भूमिका निभाएगा लेकिन कंगाल हो चुके पाकिस्तान ने इससे किनारा कर लिया । वैश्वीकरण के दौर में देशों के लिए अपने आर्थिक हितों की रक्षा करना बहुत जरूरी हो चुका है। भारत की अर्थव्यवस्था लगभग ढाई ट्रिलियन की है और मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। सऊदी अरब भारत का लाभ उठाना चाहता है। 

पिछले तीन वर्ष में मोदी दूसरी बार सऊदी अरब गए हैं। 2016 में प्रधानमंत्री की पहली सऊदी अरब यात्रा के दौरान सऊदी अरब के शाह सलमान ने उन्हें सऊदी​ अरब के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा था। मोदी सरकार भारत में आधारभूत ढांचे को लगातार मजबूत बनाने की नीतियों पर काम कर रही है। सऊदी की तेल कम्पनी आरामको महाराष्ट्र के रिफायनरी प्रोजेक्ट में निवेश कर रही है। भारत और सऊदी अरब के व्यापारिक रिश्तों में ऊर्जा क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण है। अब दोनों देशों में सैन्य संबंध भी बन रहे हैं। ईरान से तेल आयात बंद होने के बाद भारत को तेल के ​लिए सऊदी की जरूरत भी है। व्यापार एवं कारोबार के अलावा कूटनीतिक दृष्टि से भी सऊदी अरब से रिश्ते मजबूत किया जाना जरूरी है। कूटनीतिक पहल के जरिये भारत ने पाकिस्तान से जुड़े विवादों पर इस्लामिक देशों को तटस्थता की स्थिति में ला खड़ा किया है। भारत-सऊदी अरब के संबंधों में नई ऊर्जा आ रही है, यह भारत की बड़ी उपलब्धि है।

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