Nautapa Kya Hai: आखिर इन 9 दिनों में क्यों तपती है धरती और चलती है भीषण लू? जानिए क्या है मानसून का नौतपा से कनेक्शन
Nautapa Kya Hai: भारत के ज्यादातर हिस्सों में लोग भीषड़ गर्मी का सामना कर रहे हैं। आजकल पृथ्वी इतनी ज्यादा तप रही है कि लोगों को घर के अंदर भी ठंडक नहीं मिल रही है। कई हिस्सों में तेज गर्मी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। यहां तक कि तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर जा रहा है। आज से नौतपा की शुरुआत हो चुकी है, जो 2 जून तक रहने वाली है माना जाता है कि इन नौ दिनों में सूर्य की तपिश सबसे ज्यादा होती है।
इस समय गर्मी और लू का असर काफी ज्यादा बढ़ जाता है। इस दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी किसी बड़ी बीमारी का कारण बन सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं, नौतपा किस कारण पड़ता है और इस समय मौसम कैसा रहेगा।
Nautapa Scientific Reason: नौतपा होने का कारण

इस साल नौतपा की शुरुआत 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक चलने वाली है। नौतप के दौरान 9 से 10 दिनों तक बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है, जिसे मानसून का आगमन कहा जाता है। जैसे ही ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष (चंद्रमा के बढ़ते चरण) में, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उस समय से लेकर अगले दस नक्षत्रों तक बहुत ज्यादा गर्मी होती है, इसे मानसून की शुरुआत का संकेत भी कहते हैं।
Nautapa Kya Hai: सूखी जमीन और गर्म हवाएं

- इस समय लंबी गर्मी से जमीन पूरी तरह सूख चुकी होती है। सूखी मिट्टी में नमी नहीं होती है, इसलिए वह जल्दी गर्म होकर गर्मी छोड़ने लगती है।
- इस दौरान पेड़-पौधे पूरी तरह से सूखने लगते हैं, क्योंकि धरती पर नमी की कमी होने लगती है।
- जब नौतपा की शुरुआत होती है, तो उस दौरान राजस्थान की तरफ से गर्म और सूखी लू चलती हैं।
- जब ये गर्म हवाएं रेगिस्तानी के सूखे इलाकों से आती हैं, तो उत्तर भारत के मैदानों को और भी ज्यादा गर्म कर देती हैं।
- ऊंचे वायुमंडल में हवा नीचे की तरफ दबती रहती है, जिससे बादल नहीं बन पाते और बारिश नहीं होती है।
Nautapa Weather: उमस क्यों बढ़ जाती है

नौतपा के दौरान गर्मी ही नहीं, बल्कि उमस भी काफी ज्यादा बढ़ जाती है। जिसके कारण लोगों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इस दौरान पड़ने वाली भीषड़ गर्मी लोगों को बहुत ज्यादा परेशान करती है। कहा जाता है कि ये मौसम मानसून की तैयारी शुरू करने का भी संकेत होता है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी भरी हवाएं धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ने लगती हैं। इन हवाओं में पानी की भाप ज्यादा होती है, लेकिन अभी पूरी तरह बारिश नहीं होती है।

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