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पाकिस्तान की कंगाली और बदहाली

आतंकवाद की खेती करने वाले पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कंगाली के कगार पर है। लगभग ध्वस्त हो चुकी अर्थव्यवस्था के लिए इमरान खान सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
पाकिस्तान की कंगाली और बदहाली
आतंकवाद की खेती करने वाले पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कंगाली के कगार पर है। लगभग ध्वस्त हो चुकी अर्थव्यवस्था के लिए इमरान खान सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इमरान खान बेपटरी हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लगातार प्रयोग कर रहे हैं और उन्होंने अर्थव्यवस्था को एक प्रयोगशाला बनाकर रख दिया है। इसी कड़ी में उन्होंने एक बार फिर अपना वित्त मंत्री बदल दिया है। वित्त मंत्री डा. अब्दुल हफीज शेख को पद से हटा दिया है और उनकी जगह उद्योग एवं उत्पादन मंत्री हम्माद अजहर को नया वित्त मंत्री नियुक्त ​किया है। पाकिस्तान में महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है और स्थिति से चिंतित इमरान खान ने नई वित्त टीम को लाने का फैसला किया है। 
इमरान खान की सरकार बनने के बाद पाकिस्तान की जीडीपी 5.6 प्रतिशत से गिरकर -0.4 प्रतिशत तक आ गई है। इमरान खान ने अपना वित्त मंत्री ऐसे समय में बदला है जब एक बार फिर अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से 6 अरब डालर की राहत राशि दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान में आर्थिक सुधारों को लेकर उठते सवालों के दृष्टिगत यह राहत पैकेज एक साल के ​लिए रोक दिया था। वैसे भी हाल ही में सीनेट चुनाव में यूसुफ रजा गिलानी के हाथों पराजित होने वाले शेख हफीज शेख के भविष्य को लेकर अनिश्चितता थी। उन्हें पिछले साल वित्त मंत्री बनाया गया था, हालांकि वह संसद के सदस्य नहीं थे। वित्तय मंत्रालय सम्भालने वाले हम्माद अजहर इमरान सरकार के तीसरे वित्त मंत्री होंगे।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इतनी कमजोर क्यों हुई, इसके एक नहीं कई कारण हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भारत से अच्छी मानी जा रही थी, क्योंकि उसने शुरू में ओपन मार्किट व्यवस्था को अपनाया, जबकि भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया। समय के साथ-साथ सब कुछ बदल गया। भारत एक शक्तिशाली आैर महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था बन गया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था किसी भी बड़े उद्योग के न होने, भारत के खिलाफ प्रायोजित आतंकवाद, भारत के साथ अनावश्यक सैन्य प्रतिस्पर्धा और भारत के साथ चार युद्ध लड़ने के चलते कमजोर होती गई। पाकिस्तान को चिंतित होने की जरूरत थी लेकिन उसके हुकमरानों ने ऐसा नहीं किया क्योंकि उसके एल्यूमीनियम के कटोरे में अमेरिकी डालर आ रहे थे। अमेरीकी सहायता से उसका काम चल रहा था और उसके उपयोग का हिसाब भी नहीं देना पड़ता था। 
पाकिस्तान को पहले के दिन याद आते होंगे जब अंकल सैम उर्फ अमेरिका उसे बेहिसाब सहायता देता था और वे ठाठ से जी रहे थे। इस धन का उपयोग उसने भारत के जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के लिए किया। अब पाकिस्तान जरूर कह रहा होगा-‘‘कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन।’ कोई भी देश हो उसकी अर्थव्यवस्था अपनी कमाई से चलती है। यह राजस्व प्रत्यक्ष और परोक्ष करों से तथा निर्यात के लाभ से प्राप्त होता है। पाकिस्तान में इन करों की वसूली कम है। सिर्फ एक फीसदी पाकिस्तानी नागरिक ही आय कर देते हैं और निर्यात भी कम है। दुनिया को पाकिस्तान पर यकीन नहीं। यकीन होता तो विदेशी निवेशक वहां पैसे लगाते। उसे विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के जरिये विदेशी मुद्रा मिलती ही नहीं। क्योंकि वह पाकिस्तान है, भारत नहीं, वहां कोई पैसा लगाने को तैयार नहीं। उसके सामने कर्ज लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं। 38 अरब डालर यानी 2808 अरब रुपए। यह वह कीमत है जिसे लगातार एमएटीएफ की ग्रे सूची में बने रहने के कारण पाकिस्तान को विभिन्न आर्थिक मदों में चुकानी है। इस नुक्सान  का अदांजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि ये रकम 2021-22 के आम बजट में भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल आवंटित धन से भी ज्यादा है। पाई-पाई को मोहताज पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को यह पैसा मिलता है तो उसका कितना कल्याण होता। 
आतंकवाद को धन मुहैया कराकर आतंकी हमलों को पालने-पोसने से गुरेज न करने के चलते पाकिस्तान को अगले जून तक ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। इस्लामाबाद स्थि​त पाकिस्तानी थिंक टैंक तबदलैब के अनुसार लगातार ग्रे लिस्ट में शामिल होने के चलते इसके सफल घरेलू उत्पाद को 38 अरब डालर की कीमत से नुक्सान उठाना पड़ा है। वहां की खपत में छह अरब डालर की कमी आई है। निर्यात चार अरब डालर तक ​गिरा है। हालात यह है कि दूसरे देशों का कर्ज वापिस करने के ​लिए चीन की मदद पर निर्भर है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब से तीन विलियन डालर का कर्ज लिया था, जिसे वह चीन द्वारा दी गई आपातकालीन आर्थिक मदद से वापिस कर चुका है। इस्लामाबाद और सऊदी अरब के रिश्ते भी अच्छे नहीं चल रहे। चीन ने पाकिस्तान की मदद कर उसको अपने जाल में फंसा ​लिया है। कोरोना काल में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को काफी चोट पहुंची है। पाकिस्तान की कंगाली का चीन भी मजाक उड़ा रहा है। उसने 22 करोड़ की आबादी के लिए सिर्फ 5 लाख टीके देकर टरका दिया। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सुधारने की राह कठिन है। नए वित्त मंत्री के पास भी कोई जादू की छड़ी नहीं। अपने देश की एकता बनाए रखने के लिए पाक के हुकमरानों के पास भारत विरोध से अच्छा कोई तरीका नहीं।
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com
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