पंजाब के आठ सीमावर्ती गांवों में आवागमन सुविधा के लिए याचिका : उच्च न्यायालय ने केंद्र का रुख पूछा

नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा और रावी तथा उज्ज नदी के बीच घिरे पंजाब के आठ गांवों में आवागमन की समुचित व्यवस्था की मांग वाली एक याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि करीब 5000 की आबादी वाले गांव बाकी राज्य से वर्तमान में दो अस्थायी पीपा पुलों के जरिए जुड़े हैं और मानसून के दौरान इसे हटा दिया जाता है। 

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने केंद्र सरकार के वकील से याचिका में उठाए गए मुद्दे पर सरकार से निर्देश लेने को कहा। याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय परिवहन मंत्रालय से मंजूरी के बावजूद गांवों को जोड़ने के लिए राज्य सरकार पुल नहीं बनवा रही है । अदालत ने केंद्र सरकार के वकील जसमीत सिंह से कहा, ‘‘मामले के महत्व को देखते हुए आप निर्देश लें।’’ इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 27 अगस्त को निर्धारित कर दी। 

अदालत वकील विमल वधावन और पंजाब के गुरदासपुर और पठानकोट जिले में स्थित आठ गांवों के कुछ पूर्व और मौजूदा सरपंचों की ओर से दायर संयुक्त याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि बारिश के दिनों में लोगों को नौका से यात्रा करनी पड़ती है। आवाजाही का बेहतर जरिया नहीं होने से फसल की ढुलाई में भी दिक्कत आती है। 

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