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पीएम मोदी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था का समर्थन जारी रखने का आह्वान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश की जनता का आह्वान किया कि जिस प्रकार उन्होंने दिवाली और अन्य त्योहारों में स्थानीय अर्थव्यवस्था (लोकल इकॉनमी) का समर्थन किया
पीएम मोदी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था का समर्थन जारी रखने का आह्वान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश की जनता का आह्वान किया कि जिस प्रकार उन्होंने दिवाली और अन्य त्योहारों में स्थानीय अर्थव्यवस्था (लोकल इकॉनमी) का समर्थन किया, उसे इसी प्रकार आगे भी जारी रखें। उन्होंने संतों और महात्माओं से भी ‘‘वोकल फॉर लोकल’’ यानी स्थानीय चीजों को अधिक महत्व देने के संदेश को घर-घर पहुंचाने का आग्रह किया। 
प्रधानमंत्री मोदी जैनाचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज की 151वीं जयंती पर उनके सम्मान में स्थापित ‘स्टैच्यू ऑफ पीस’ का अनावरण करने के बाद संत समुदाय और आम जन को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। अष्टधातु से बनी 151 इंच ऊंची यह प्रतिमा राजस्थान के पाली जिले के जेतपुरा स्थित विजय वल्लभ साधना केंद्र में स्थापित की गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संतों और महात्माओं ने स्वाधीनता आंदोलन को सुदृढ़ करने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उसी प्रकार उनके लिए आज ‘‘वोकल फॉर लोकल’’ के संदेश को आगे बढ़ाने का वक्त आ गया है। 
मोदी ने कहा, ‘‘आज 21वीं सदी में मैं आचार्यों, संतों से एक आग्रह करना चाहता हूं कि जिस प्रकार आजादी के आंदोलन की पीठिका भक्ति आंदोलन से शुरु हुई। वैसे ही आत्मनिर्भर भारत की पीठिका तैयार करने का काम संतों, आचार्यों, महंतों का है। उन्होंने कहा, ‘‘आप जहां भी जाएं, जहां भी बोलें आपके मुंह से ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश देश के हर व्यक्ति तक पहुंचते रहना चाहिए।
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत वोकल फॉर लोकल के मंत्र को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए मोदी ने कहा कि इस बार दिवाली और सभी त्योहारों पर जिस तरह से देश ने ‘‘लोकल इकॉनमी’’ को जमकर समर्थन दिया वह ‘‘वाकई नई ऊर्जा’’ देने वाला है। उन्होंने कहा, ‘‘इस सोच को और इस प्रयास को हमें आगे भी बनाए रखना है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि नया साल आध्यात्मिक आभा का वर्ष है और प्रेरणा देने वाला है। उन्होंने कहा कि गुजरात की धरती दो वल्लभों की जननी है। राजनीतिक क्षेत्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल और आध्यात्मिक क्षेत्र में आचार्य विजय वल्लभ जी महाराज। 
मोदी ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि देश ने उन्हें गुजरात के केवडिया में सरदार वल्लभ भाई पटेल की विश्व की सबसे ऊंची ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के लोकार्पण का अवसर दिया और आज जैनाचार्य विजय वल्लभ की ‘स्टैच्यू ऑफ पीस’ के अनावरण का सौभाग्य भी उन्हें मिला । उन्होंने विश्वस व्यक्त किया कि 'स्टैच्यू ऑफ पीस' विश्व में शांति, अहिंसा और सेवा का एक प्रेरणा स्रोत बनेगी। उन्होंने कहा कि आचार्य वल्लभ ने भारत को शिक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया। उन्होंने कई राज्यों में कई शिक्षा संस्थानों की स्थापना की। 
मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा पूरे विश्व और मानवता को शांति, अहिंसा और बंधुत्व का मार्ग दिखाया है और ये वो संदेश हैं जिनकी प्रेरणा विश्व को भारत से मिलती है। उन्होंने कहा, ‘‘इसी मार्गदर्शन के लिए दुनिया आज एक बार फिर भारत की ओर देख रही है। भारत का इतिहास आप देखें तो आप महसूस करेंगे जब भी भारत को आंतरिक प्रकाश की जरूरत हुई है, संत परंपरा से कोई न कोई सूर्य उदय हुआ है। कोई न कोई बड़ा संत हर कालखंड में हमारे देश में रहा है, जिसने उस कालखंड को देखते हुए समाज को दिशा दी है। आचार्य विजय वल्लभ जी ऐसे ही संत थे।’’ 
वर्ष 1870 में जन्मे विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज ने भगवान महावीर के संदेश को प्रचारित करने के लिए निःस्वार्थ भाव से जैन संत के रूप में अपना जीवन बिताया। उन्होंने आम लोगों की भलाई के लिए, शिक्षा के प्रसार के लिए, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए लगातार काम किया। उन्‍होंने कविताओं, निबंधों और भक्ति रचनाओं जैसे प्रेरक साहित्य की भी रचना की। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय योगदान किया और स्वदेशी का प्रचार किया। 
विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज की प्रेरणा से कई राज्यों में स्‍कूल, कॉलेज और अध्ययन केंद्र सहित 50 से अधिक शैक्षिक संस्थान काम कर रहे हैं। उनके सम्मान में स्थापित की जा रही इस प्रतिमा को शांति प्रतिमा नाम दिया गया है। विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज का देहावसान 1954 में हुआ था। 
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