+

पुलिस-वकील झड़प : उच्च न्यायालय ने दो पुलिसकर्मियों को दी गिरफ्तारी से अंतरिम राहत

पुलिस-वकील झड़प : उच्च न्यायालय ने दो पुलिसकर्मियों को दी गिरफ्तारी से अंतरिम राहत
तीस हजारी जिला अदालत में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुई झड़प के मामले में आरोपी दो अफसरों को राहत देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।
 
तीस हजारी अदालत परिसर में दो नवंबर को पार्किंग को लेकर ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी और एक वकील के बीच शुरू हुआ विवाद दोनों पक्षों के बीच झड़प में बदल गया था। इस झड़प में 20 पुलिसकर्मी और कुछ वकील घायल हो गए थे। 

दो सहायक पुलिस उप निरीक्षकों की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने केंद्र दिल्ली पुलिस, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और अन्य बार संगठनों से जवाब मांगा है। 

पुलिसकर्मियों ने अपनी याचिका में घटना की न्यायिक जांच जारी रहने तक गिरफ्तारी से छूट की मांग की थी। 

पीठ ने अपने आदेश में नोटिस जारी करते हुये कहा कि प्रतिवादियों के वकील जवाब दाखिल करने के लिये समय चाहते हैं। पीठ ने उन्हें आज से चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने और प्रत्युत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामले में अब 23 दिसंबर को आगे सुनवाई होगी। 

पीठ ने कहा, ‘‘इसबीच (तीनों) प्राथमिकियों पर कार्रवाई के दौरान आवेदकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई ना की जाए।’’ 

अदालत दोनों पुलिसकर्मियों कांता प्रसाद और पवन कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दोनों अधिकारियों ने 11 नवंबर का निचली अदालत का आदेश रद्द करने का अनुरोध किया है। दोनों को घटना के बाद निलंबित कर दिया गया था। 

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने 11 नवंबर को पुलिस को निर्देश दिया था कि वह झड़प के मामले में 20 नवंबर तक स्थिति रिपोर्ट दायर करे। 

पुलिस अधिकारियों ने न्यायिक जांच पूरी होने तक निचली अदालत के फैसले और सुनवाई पर स्थगन लगाने का भी अनुरोध किया है। उच्च न्यायालय ने ही तीन नवंबर को इस आशय में आदेश दिए थे। 

पुलिसकर्मियों की ओर से अधिवक्ता राजदीपा बेहुरा ने अदालत को बताया कि सभी जिला अदालतों में वकील हड़ताल पर हैं और पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां अग्रिम जमानत के लिए नहीं आयी हूं। मैं सिर्फ यह कह रही हूं कि न्यायिक जांच पूरी होने तक उन्हें (दोनों पुलिसकर्मियों को) दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया जाए। ’’ 

उन्होंने वकीलों से हड़ताल खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि वकीलों और पुलिस के बीच यह मतमुटाव संस्था को नुकसान पहुंचा रही है। 

पुलिस अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि निचली अदालत ने जांच की निगरानी करने की जिम्मेदारी लेकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है क्योंकि न्यायमूर्ति (अवकाश प्राप्त) एस.पी. गर्ग की अध्यक्षता में पहले से ही न्यायिक जांच चल रही है। 

दिल्ली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि झड़प के मामले में पुलिस अपने अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
 
उन्होंने कहा कि अदालत ने तीन नवंबर के आदेश में न्यायिक जांच और घटना की जांच को अलग-अलग रखा था, और पुलिस अधिकारी यह नहीं कह सकते हैं कि न्यायिक जांच पूरी होने तक कोई जांच ना की जाए। 

इस झड़प के खिलाफ चार नवंबर से ही छह जिला अदालतों के वकील हड़ताल पर हैं। 

दिल्ली पुलिस के हजारों कर्मियों ने भी पांच नवंबर को पुलिस मुख्यालय के सामने 11 घंटे तक प्रदर्शन किया था। दिल्ली पुलिस का यह प्रदर्शन अभूतपूर्व था। 

Tags : ,Police-lawyer clash,High court,arrest,policemen,clash,lawyers,Tis Hazari,district court,Delhi High Court
facebook twitter