Punjab कांग्रेस में नहीं थम रही गुटबाजी, पंजाब से हटाए गए भूपेश बघेल, पायलट की एंट्री
नई दिल्ली: कांग्रेस आलाकमान ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए कई राज्यों के प्रभारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। सबसे बड़ा बदलाव पंजाब कांग्रेस में हुआ है, जहां पार्टी ने भूपेश बघेल को प्रभारी पद से हटाकर असम की जिम्मेदारी सौंप दी है। उनकी जगह वरिष्ठ नेता सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब पंजाब कांग्रेस लंबे समय से अंदरूनी कलह और गुटबाजी से जूझ रही है।
पंजाब में गुटबाजी के बीच बड़ा फैसला
कांग्रेस में हुए इस संगठनात्मक बदलाव को पंजाब इकाई में चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक गुट और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के समर्थकों के बीच लंबे समय से मतभेद सामने आते रहे हैं।
पार्टी नेतृत्व ने संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से पंजाब में प्रभारी का चेहरा बदलने का फैसला किया है। अब सचिन पायलट के सामने पंजाब कांग्रेस के दोनों प्रमुख गुटों के बीच संतुलन बनाने और संगठन को एकजुट करने की चुनौती होगी।
भूपेश बघेल को मिली असम की जिम्मेदारी
कांग्रेस ने भूपेश बघेल को पंजाब के प्रभारी पद से हटाकर असम की जिम्मेदारी सौंपी है। बघेल पिछले कुछ समय से पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक गतिविधियों को संभाल रहे थे। उन्होंने पार्टी के अलग-अलग नेताओं और गुटों के साथ बातचीत कर मतभेद दूर करने की कोशिश भी की थी।
हालांकि, लगातार जारी विवाद और गुटबाजी पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी। ऐसे में पार्टी नेतृत्व ने अब पंजाब में नए प्रभारी के तौर पर सचिन पायलट को आगे किया है।
सचिन पायलट के सामने बड़ी चुनौती
पंजाब कांग्रेस की जिम्मेदारी मिलने के बाद सचिन पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को खत्म करना होगी। विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए पायलट को प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करना होगा।
पार्टी के भीतर अलग-अलग खेमों के बीच बढ़ती दूरी को कम करना और चुनावी तैयारियों को गति देना भी उनके लिए अहम जिम्मेदारी होगी। माना जा रहा है कि पंजाब संगठन में आने वाले दिनों में कुछ और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
जुलाई में भी सामने आया था विवाद
पंजाब कांग्रेस में विवाद उस समय और खुलकर सामने आया, जब जुलाई 2026 में आलाकमान ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया।
इस फैसले के बाद चन्नी समर्थक खेमे की नाराजगी खुलकर सामने आई। पार्टी की बैठकों में अलग-अलग नेताओं के समर्थन में नारेबाजी हुई। कुछ मौकों पर स्थिति धक्का-मुक्की और कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई तक पहुंच गई। इस दौरान 'चन्नी जिंदाबाद' और 'बघेल गो बैक' जैसे नारे लगाए जाने की बात भी सामने आई थी।
बघेल ने की थी विवाद सुलझाने की कोशिश
पंजाब प्रभारी रहते हुए भूपेश बघेल ने कई बार राज्य का दौरा किया और पार्टी नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने अलग-अलग गुटों के नेताओं से बातचीत कर विवाद को सुलझाने और संगठन को एकजुट रखने की कोशिश की।
इसके बावजूद पार्टी के भीतर मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हो सके। ऐसे में अब कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब की जिम्मेदारी सचिन पायलट को सौंपकर संगठन को नई दिशा देने की कोशिश की है।
गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में भी बदलाव
कांग्रेस के संगठनात्मक फेरबदल का असर सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं रहा। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कई राज्यों के महासचिव और प्रभारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है।
रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का महासचिव प्रभारी बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें कर्नाटक के महासचिव प्रभारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है। वहीं सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है।
डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी. वी. मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि मुकुल वासनिक एआईसीसी महासचिव के पद पर पहले की तरह अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।
तत्काल प्रभाव से लागू हुई नियुक्तियां
कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पार्टी अध्यक्ष ने तत्काल प्रभाव से विभिन्न राज्यों के लिए एआईसीसी महासचिव और प्रभारी के तौर पर नई नियुक्तियां और जिम्मेदारियां तय की हैं।
इन बदलावों को आगामी चुनावों की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए आलाकमान ने नई टीम और नई जिम्मेदारियों के जरिए रणनीति में बदलाव का संकेत दिया है।
अब सभी की नजरें सचिन पायलट पर रहेंगी कि वह पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी को किस तरह संभालते हैं और चुनावी तैयारियों के लिए पार्टी को कितना एकजुट कर पाते हैं।

Join Channel