‘डेंगू सिटी’ पर गर्मायी सियासत

हल्द्वानी : लापरवाह जनप्रतिनिधियों व संवेदनहीन अधिकारियों की वजह से हल्द्वानी में दो महीने में भी डेंगू नियंत्रित नहीं हो सका। स्वास्थ्य विभाग की महज औपचारिकता भर के लिए की जा रही कार्रवाई का कोई असर नहीं दिख रहा है। वहीं, नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में गहरी नाराजगी है। महामारी की तरह शहर को अपनी चपेट में ले चुके डेंगू से बचने के लिए सरकारी अस्पतालों में हायतौबा मची है। लोग दहशत में हैं। 

कुछ निजी क्लीनिकों व लैबों में  मरीज लुट रहे हैं। इसके बावजूद हमारा तंत्र कहीं भी अलर्ट मोड में  नजर नहीं आया। इससे अधिक शर्मनाक स्थिति क्या होगी, जब पूरी व्यवस्था डेंगू  के खत्म होने के लिए ठंड का इंतजार करने लगी है। यानी सिस्टम खुद असहाय हो चुका है। जिस हल्द्वानी को क्लीन सिटी कहा जाता है, वहां सिस्टम की लापरवाही के चलते डेंगू ने इस कदर पांव पसार दिए हैं कि इसे अब डेंगू सिटी  कहना गलत नहीं होगा। 

पिछले एक पखवाड़े से शहर में डेंगू का कहर है और सरकारी तथा प्राइवेट अस्पतालों में हर आम आदमी व खास वर्ग के लिए व्यवस्था भी भाजपा और कांग्रेस बीच बंट गई है। कभी मंत्री के रूप में शहर के विकास के लिए अपना एलोकेट करने का आर्डर करने वाली इंदिरा ह्दयेश यद्यपि पिछले दिनों धरने पर भी बैठी। इंदिरा ह्दयेश आवाज जरूर बुलंद करती रहती है। 

इंदिरा ने उपवास के माध्यम से लोगों के बीच अपनी उपस्थिति रखी तो वहीं कांग्रेसी भी एकजुट हो रहे है, लेकिन शून्य स्तर पर कांग्रेस का दयनीय प्रदर्शन उनके मार्ग में आड़े आ रहा है। बातचीत में वह कहती है कि प्रदेशवासियों के लिए भाजपा सरकार कुछ नहीं कर रही है विकास कार्य ठप्प है लेकिन हम चुप नहीं बैठैगे तथा डेंगू से निपटने के लिए सरकारी प्रशासन कुंभकर्ण की नींद में है लेकिन हम उन्हें जगाते रहेंगे।
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