प्रयागराज : आकाशीय बिजली गिरने से 35 गायों की मौत के प्रशासन के दावे पर सवाल

जिले के बहादुरपुर विकास खंड स्थित कांदी गांव में बुधवार रात कथित तौर पर आकाशीय बिजली गिरने से 35 गायों की मृत्यु हो गई। प्रशासन के आला अधिकारी गायों की मौत की वजह बिजली गिरना बता रहे हैं, जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि कल रात कोई आकाशीय बिजली गिरी ही नहीं। 

प्रशासन द्वारा 35 गायें मरने के दावे के उलट स्थानीय लोगों का कहना है कि 52 बीघे तालाब में बने इस स्थानीय गौशाला में पिछले दो-तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश की वजह से तालाब पानी से भर गया जिससे भूख और पानी में फंस कर गुरूवार सुबह तक करीब 50-60 गायों की मौत हो चुकी है। 

कांदी गांव के प्रधान सचेंद्र प्रताप सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘यहां 356 गायें थीं जिसमें से 30-32 गायें मरीं। रात करीब ढाई बजे बिजली गिरी जिसके बाद मैं भागकर यहां आया हूं। बाकी बची गायों को पास की एक गौशाला में स्थानांतरित कराया गया है।’’ 

मौके पर मौजूद अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) विजय शंकर दूबे ने कहा, ‘‘वास्तव में आकाशीय बिजली गिरने से 22 जानवर तत्काल मर गए। इसके बाद आज दोपहर 12 बजे के आसपास घायल छह जानवर मर गए और शाम पांच बजे के लगभग 7 जानवर इलाज के दौरान मरे।’’ 

यह पूछे जाने पर कि ग्राम समाज की जमीन उपलब्ध होने के बावजूद इन गायों को तालाब में क्यों रखा गया, इस पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। इस गौशाला में कोई टिन शेड भी नहीं है और पिछले कई दिनों से ज्यादातर गायें खुले आसमान में बारिश में भीग रही थीं। 

मुख्य विकास अधिकारी अरविंद सिंह ने कहा कि यदि टिन शेड लगा होता तो और संख्या में गायों की मौत हो गई होती। 
मौके पर मौजूद एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी कुछ देर के लिए घटनास्थल पर आए और आला अधिकारियों को बचाव एवं राहत कार्य का निर्देश देकर चले गए। 

कांदी गांव के निवासी मूल चंद्र ने कहा, ‘‘पिछले तीन दिनों में 50-60 गायें मरी हैं। यहां पिछली रात कोई बिजली नहीं गिरी.. ये बिना खाये पिए मर रही हैं। जो जानवर गड्ढे में चला जाएगा वह मर नहीं जाएगा? अगर बिजली गिरती तो यहां के लोगों को पता नहीं चलता? अगर बिजली गिरती तो पानी में सारे जानवर मर गए होते।’’ 

बहरिया गांव में एक जूनियर हाईस्कूल के शिक्षक ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘‘मेरा घर गौशाला के ठीक सामने है.. अगर बिजली गिरती तो हमें नहीं पता चलता? वास्तव में कहानी कुछ और है।’’ 

उन्होंने बताया कि जब से यहां गौशाला खुली है, तब से हर दूसरे तीसरे दिन एक-दो गायें मर रही हैं। अभी तक उन्हें जेसीबी से गड्ढा खोदकर गाड़ दिया जाता था, लेकिन तीन दिनों से लगातार पानी बरसने से तालाब में पानी भर गया और जेसीबी मशीन यहां पहुंच नहीं सकी जिससे इन गायों की लाशें पानी में तैरने लगीं। 

उन्होंने कहा कि अगर तालाब की जमीन खुदवाएं तो सैकड़ों गायों की कंकाल आपको देखने को मिलेंगी। तीन दिन की बारिश ने इस मामले को उजागर कर दिया। 

उल्लेखनीय है कि इस गौशाला को सरकारी सहायता से चलाया जाता है और प्रति गाय चारे के लिए शासन 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से राशि देता है। 
भाषा : राजेंद्र प्रियभांशु 
Download our app