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महाराष्ट्र: पृथ्वीराज चव्हाण ने केंद्र पर कोविड संबंधित मदद में भेदभाव का लगाया आरोप

महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने शनिवार को केंद्र पर विभिन्न राज्यों को पीपीई किट, एन95 मास्क और वेंटिलेटर जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों के वितरण में राजनीति के आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया।
महाराष्ट्र: पृथ्वीराज चव्हाण ने केंद्र पर कोविड संबंधित मदद में भेदभाव का लगाया आरोप
महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने शनिवार को केंद्र पर विभिन्न राज्यों को पीपीई किट, एन95 मास्क और वेंटिलेटर जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों के वितरण में राजनीति के आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने यहां जारी एक बयान में कहा कि केंद्र से मिली जानकारी से ही इस राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण वितरण की पुष्टि हुई है। 
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कोविड-19 के सबसे अधिक मामले होने के बावजूद इस राज्य के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। चव्हाण ने कहा कि चिकित्सा उपकरणों के वितरण को लेकर 12 फरवरी को लोकसभा में एक तारांकित प्रश्न पर केंद्र के जवाब से चौंकाने वाली तस्वीर सामने आयी। 
उन्होंने लोकसभा में केंद्र के जवाब को उद्धृत करते हुए कहा, ‘‘महाराष्ट्र की तुलना में गुजरात को प्रति हजार कोविड-19 रोगियों पर 9,623 एन95 मास्क मिले, जबकि महाराष्ट्र को प्रति हजार रोगियों पर 1,560 मास्क मिले। यहां तक ​​कि उत्तर प्रदेश को 3,916 एन-95 मास्क मिले, जो महाराष्ट्र की तुलना में दोगुने से अधिक है। 
पीपीई किट के मामले में गुजरात को प्रति हजार पर 4,951 किट मिलीं और उत्तर प्रदेश को 2,446 किट मिली जबकि महाराष्ट्र को सिर्फ 223 किट मिली।’’ उन्होंने कहा कि गुजरात को प्रति 1000 मरीजों पर 13 वेंटिलेटर दिए गए, उत्तर प्रदेश को सात जबकि महाराष्ट्र को प्रति हजार कोविड​​-19 मरीजों पर केवल दो वेंटिलेटर मिले, वहीं केरल को प्रति हजार मरीज के आधार पर महाराष्ट्र से भी कम मिले। 
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘लोकसभा के जवाब के अनुसार, सभी श्रेणियों में गुजरात को चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति के मामले में बड़ा हिस्सा दिया गया जो मामलों की संख्या के आधार पर अधिक है। यह राजनीति के आधार पर भेदभाव नहीं तो क्या है।’’ चव्हाण ने कहा कि नरेंद्र मोदी भूल रहे हैं कि वह पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं, सिर्फ गुजरात, उत्तर प्रदेश और कुछ भाजपा शासित राज्यों के नहीं। 


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