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पंजाब केसरी ने मनाया आजादी का अमृत महोत्सव

वैसे तो देश में हर साल पन्द्रह अगस्त यानि कि स्वतंत्रता दिवस का एक खास महत्व होता है और इस दिन हर कोई एक अजीब सी उमंग में खो जाता है और तिरंगे के प्रति समर्पित रहता है, बस यही हमारी आजादी की विशेषता है।
पंजाब केसरी ने मनाया आजादी का अमृत महोत्सव
वैसे तो देश में हर साल पन्द्रह अगस्त यानि कि स्वतंत्रता दिवस का एक खास महत्व होता है और इस दिन हर कोई एक अजीब सी उमंग में खो जाता है और तिरंगे के प्रति समर्पित रहता है, बस यही हमारी आजादी की विशेषता है। लेकिन इस बार हमें आजाद हुए 75 साल होने जा रहे हैं इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस खास मौके पर घर-घर तिरंगा अभियान का आह्वान किया है। जैसा कि पंजाब केसरी का इतिहास है देशभक्ति का कोई भी कार्य हो या देश में कोई आपदा हो हमेशा पंजाब केसरी देश के साथ खड़ा होता है और बढ़चढ़ कर देश को आगे बढ़ाने के लिए हिस्सा लेता है और अपना पूरा प्रयास करता है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान से लेकर योग करो, रोग भगाओ और अब घर-घर तिरंगा अभियान पंजाब केसरी हर बार ऐसे सामाजिक और क्रांतिकारी अभियानों के साथ जुड़ा रहा है और आप सभी से वादा है कि भविष्य में भी जुड़े रहेंगे। हालांकि बीच में कोरोना के खिलाफ मास्क लगाओ, वैक्सीन लगवाओ जैसे अभियान और इन सबमें हिट हुआ दो गज दूरी, मास्क है जरूरी, इस अभियान में भी पंजाब केसरी ने अपनी परंपरा निभाई। मैं सीधे अब घर-घर तिरंगा अभियान की बात कर रही हूं कि हमने अपने स्टाफ से कहा कि वह तिरंगा लहराते हुए अपने परिवार का चित्र हमें भेजें लेकिन हमारी उम्मीद से बढ़कर रिस्पांस मिला और शत्-प्रतिशत स्टाफ इसमें शामिल हुआ तो मुझे अनेक शुभचिंतकों के फोन आने लगे और वह अपनी फोटो तथा वीडियो बनाकर भेजने लगे। हमने भी हर रोज दो दिन के पेज तिरंगे के नाम कर दिये और यह अभियान अब भी जारी है। क्या शिक्षक, क्या वकील, क्या डाक्टर, क्या इंजीनियर, क्या आम आदमी, क्या बच्चे और क्या महिलाएं और हमारे वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब के सभी सदस्य और उनके परिवार, जेआर मीडिया इंस्टीच्यूट स्टाफ और छात्र, चौपाल के सभी साथी किसी भी जोश से कम नहीं हैं। यहां तक कि कई कैबिनेट मंत्रियों की पत्नियों और सैलिबीटीज के फोटो आ रहे हैं, कई वीडियो आ रहे हैं, जिन्हें हम वीएनकेसी के फेसबुक पेज पर अपलोड कर रहे हैं।
आज तक हमें अपनी फोटो भेज रहा है और हम इसे प्रकाािशत कर रहे हैं। मेरे कहने का मतलब आजादी के प्रति एक जुनून जो हमने बचपन में पंद्रह अगस्त के मौके पर अनुभव किया  है वह आज भी बरकरार है। और जब हम कोई  ऐसा अभियान शुरू करते हैं और लोग उससे जुड़ते हैं तो अच्छा लगता है। ऐसे लगता है कि पूरे देश में इस समय क्रांति की लहर चल रही है। यहां तक कि छोटी-छोटी बैटरी रिक्शा पर भी तिरंगे लगे हुए हैं, ऑटो, टैक्सी, बसें, ट्रक, बाईकर्स, स्कूटी सवार हर किसी के वाहन पर तिरंगा लगा हुआ है। यह सब देखकर अच्छा लगता है। अगर कहीं आसमान से तस्वीर ली जाये तो निश्चित रूप से पूरी की पूरी पृथ्वी तिरंगे से भरी हुई दिखाई देगी नासा के यहां से जिस तरह तस्वीरें खींची जाती हैं और मुझे याद है कि प्रदूषण बढऩे के लिए पराली जलाए जाने से धरती के किस हिस्से में ज्यादा लाली है यह चित्र नासा ने खींच कर दुनियाभर में वायरल किये थे और इसे पर्यावरण के लिहाज से नकारात्मक रूप से प्रचारित किया गया था। तो ऐसे में नासा पूरे भारत की पृथ्वी की अब तिरंगामयी तस्वीर ले सकता है। सकारात्मकता भारत की संस्कृति है और यही हमारी पहचान है। 
इस आजादी के अमृत उत्सव के मौके पर हम सामाजिक तौर पर कई  चीजों का विरोध कर सकते हैं। नशा विरोधी चीजों का विरोध किया जाना चाहिए। ड्रग्स का विरोध किया जाना चाहिए, भिक्षावृत्ति का विरोध किया जाना चाहिए और सबसे बड़ी बात है कि सामाजिक जीवन में विवाहों के दौरान दहेज जैसी कुप्रथा खत्म करने का संकल्प लिया जाना चाहिए। अगर हम इस आजादी की पावन बेला पर ऐसे संकल्प लेते हैं तो यह एक अच्छी प्रथा है। मुझे खुशी इस बात की है कि इस तिरंगे फहराने की जो मुहिम पंजाब केसरी ने प्रधानमंत्री के आह्वान पर आगे बढ़ाई है उस समर्थन के प्रति मैं इस अभियान के हर हमसफर, हर सहयोगी को बधाई देती हूं। उम्मीद की जानी चाहिए कि यूथ आगे चलकर कुरीतियों के खिलाफ भी कोई मुहिम चलाएगा। सबसे बड़ी बात है कि एक अच्छा नागरिक अर्थात देश का अच्छा शहरी बनने के लिए अनुशासन का संकल्प भी होना चाहिए। अनुशासन केवल सेना या स्कूलों से जुड़ा हुआ कोई वचन नहीं है जिसे निभाना है बल्कि पूरे देश को अनुशासन निभाना है। सड़कों पर स्पीड से गाड़ी न दौड़ाना भी एक अनुशासन है। हैल्मेट पहनकर वाहन चलाना यह भी अनुशासन है, रेडलाइट  जंप न करना भी अनुशासन है, किसी गरीब की मदद करना, बुजुर्ग की मदद करना, उनके सम्मान को सुरक्षित रखना यह भी अनुशासन है। आजादी के इस अमृत उत्सव पर आओ हम एक-दूसरे की तकलीफों को समझें, उनके दु:ख-दर्द में काम आएं यह इंसानियत के साथ-साथ  राष्ट्रीयता  है और इस राष्ट्रीयता को अमृत महोत्सव के मौके पर हम नमन करते हैं। जय हिंद, जय भारत।

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